Rajasthan

बाल साहित्य की नई भोर: डॉ. सुशीला जोशी की काव्य कृति “भोर के तारे” का भव्य लोकार्पण समारोह सम्पन्न

कोटा, राजस्थान – प्रेस क्लब सभागार में एक ऐतिहासिक साहित्यिक क्षण का साक्षी बना, जब सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. सुशीला जोशी की प्रथम बाल काव्य कृति “भोर के तारे” का भव्य लोकार्पण समारोह रंगीतिका संस्थान और आर्यन लेखिका मंच के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जितेन्द्र निर्मोही ने की, जबकि गजेन्द्र व्यास मुख्य अतिथि और अतुल कनकस्नेहलता शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे। मंच पर रीता गुप्ता (रंगीतिका संस्थान की कार्यकारी अध्यक्ष), संयोजक महेश पंचोली तथा कृतिकार डॉ. सुशीला जोशी ने सरस्वती पूजन व दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

सृजन यात्रा की झलक और बाल मन की अभिव्यक्ति:
मुख्य वक्ता स्नेहलता शर्मा ने “भोर के तारे” की सृजन प्रक्रिया और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जितेन्द्र निर्मोही, अतुल कनक, और दिनेश विजय जैसे साहित्यकारों के विचारों को सारगर्भित रूप से प्रस्तुत किया।

अतिथियों के विचार:

  • अतुल कनक ने कहा, “बाल साहित्य को बाल मन के साथ उतरकर ही लिखा जा सकता है, और यह कृति इसकी एक सशक्त मिसाल है।”
  • गजेन्द्र व्यास ने हँसते हुए कहा, “अब मुझे भी लिखना शुरू करना पड़ेगा, इतनी प्रेरणा मिल रही है!”
  • जितेन्द्र निर्मोही ने इसे आयोजन की सबसे बड़ी सफलता बताया कि कृतिकार की रचनाएं उनके पोत्रों द्वारा मंच पर प्रस्तुत की गईं।

प्रकाशन और शोध में योगदान:
प्रकाशक नवीन गौतम ने कोटा में साहित्य प्रकाशन की कमी को पूरा करने का संकल्प दोहराया। डॉ. युगल सिंह द्वारा लिखे जा रहे शोध ग्रंथ “हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य: उद्भव और विकास” में डॉ. सुशीला जोशी को 43वें बाल साहित्यकार के रूप में स्थान मिला है। डॉ. वैदेही गौतम द्वारा “हाड़ौती अंचल का गीति काव्य” पर हो रहा शोध भी इस क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

इतिहास और भविष्य की कड़ी:
कार्यक्रम में उमानंदन चतुर्वेदी की ऐतिहासिक बाल काव्य कृति “नन्हे मुन्नों की चम्बल यात्रा” का भी स्मरण हुआ, जो साठ के दशक में प्रस्तुत की गई थी। यह बताया गया कि आज भी साहित्य अपनी अस्मिता के साथ खड़ा है, भले ही समय-समय पर देश ने चुनौतियों का सामना किया हो।

समारोह का समापन:
कार्यक्रम के अंत में लेखक, लेखिकाओं, परिजनों और अतिथियों ने डॉ. सुशीला जोशी का सम्मान किया। धन्यवाद ज्ञापन उनके सुपुत्र द्वारा किया गया।

“भोर के तारे” न केवल एक काव्य संग्रह है, बल्कि यह बाल साहित्य की नई सुबह का प्रतीक है – एक ऐसी भोर, जो नई चेतना, आशा और संस्कारों की अलख जगाती है।

प्रेषक: देवकी दर्पण

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