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उत्तराखंड में मुस्लिमों पर हमलेः नैनीताल हिंसा के बाद पर्यटन उद्योग चौपट, होटल व्यवसाय संकट में

नैनीताल – उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल नैनीताल इन दिनों नाबालिग लड़की से दुष्कर्म की दिल दहला देने वाली घटना के बाद तनाव और विरोध-प्रदर्शनों के चलते चर्चा में है। इस घटना ने न केवल लोगों में भारी आक्रोश पैदा किया है, बल्कि शहर के पर्यटन उद्योग को भी गहरी चोट पहुंचाई है।

सामान्य दिनों में पर्यटकों से गुलजार रहने वाला नैनीताल अब सुनसान नजर आ रहा है। दहशत और अस्थिरता के माहौल में सैकड़ों पर्यटक अपनी यात्रा बीच में छोड़कर लौट गए हैं। नैनी झील, स्नो व्यू, रोपवे, चिड़ियाघर और केव गार्डन जैसे लोकप्रिय स्थलों पर वीरानी छाई है। नावें किनारे पर खाली खड़ी हैं और होटल खाली पड़े हैं।

इस घटना के विरोध में शहर में व्यापक प्रदर्शन हुए, दुकानों में तोड़फोड़ की गई और बाजार बंद रहे। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट के अनुसार, “कुछ दिन पहले तक पर्यटन चरम पर था, लेकिन अब पूरी स्थिति उलट चुकी है।”

प्रदर्शनों के चलते मॉल रोड और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है। पर्यटकों को खाने-पीने की चीजों तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि व्यापार मंडल ने भंडारा आयोजित कर पर्यटकों के लिए भोजन और बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की है, फिर भी अधिकतर पर्यटक बुकिंग रद्द कर शहर छोड़ रहे हैं।

दुष्कर्म के आरोपी, पेशे से ठेकेदार उस्मान को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे हल्द्वानी की पॉक्सो कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस, यूके-पीएसी और सीएपीएफ की तैनाती की गई है। देर रात शहर में फ्लैग मार्च भी निकाला गया।

विवाद तब और बढ़ गया जब आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बिना दोष सिद्ध हुए ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती।

इस घटना ने नैनीताल की छवि और आर्थिक स्थिति दोनों को गहरा झटका दिया है। स्थानीय निवासी और व्यापारी भय व चिंता में हैं। एक निवासी ने कहा, “हम शर्मिंदा और आहत हैं, यह हमारे शहर के लिए काला दिन है।”

प्रशासन अब हालात सामान्य करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पर्यटन उद्योग को दोबारा संजीवनी देने में वक्त लगेगा।

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