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दिल्ली में संदिग्ध हालात में चार एसी मैकेनिकों की मौत; गांवों में पसरा मातम

नई दिल्ली | देश की राजधानी दिल्ली के आंबेडकर नगर स्थित दक्षिणपुरी इलाके में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने चार परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। कमरे में सो रहे चार एसी मैकेनिकों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। प्रारंभिक आशंका है कि यह मौतें गैस लीक की वजह से दम घुटने के कारण हुईं।

दिल्ली पुलिस ने चारों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। चारों मृतक उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले थे और आपस में दोस्त थे। हादसे की सूचना मिलते ही उनके गांवों में मातम फैल गया।


काम की तलाश में दिल्ली आए थे, लौटे तो अर्थी पर

मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • हसीब (सनैया रानी, बरेली): अनाथ था, बहन के साथ नानी के घर बंडिया में पला बढ़ा। अब उसकी मौत के बाद बहन अकेली रह गई है।
  • मोहसिन (22 वर्ष, बंडिया): पिता रेलवे से रिटायर्ड, मां का नाम किशबरी।
  • इमरान (25 वर्ष, मेवाकुवर): नौ भाई-बहनों में एक, सबसे बड़े भाई की पहले ही हो चुकी है मौत।
  • कपिल उर्फ अंकित रस्तोगी (17 वर्ष): पिता का पहले निधन हो चुका था, मां पूनम और बड़े भाई के साथ रहता था।

चारों दोस्त पंद्रह दिन पहले ही छुट्टियों में अपने गांव आए थे और करीब एक सप्ताह पूर्व ही दिल्ली काम पर लौटे थे। किसे मालूम था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी।


कमरे में गैस रिसाव से मची त्रासदी

जानकारी के अनुसार, दक्षिणपुरी स्थित किराए के कमरे में चारों एक साथ सोए हुए थे।
सुबह जब वे नहीं उठे, तो मकान मालिक ने शक होने पर दरवाजा तोड़ा। भीतर चारों बेसुध पड़े थे, और तब तक दम तोड़ चुके थे।
मौके पर पहुँची पुलिस ने गैस रिसाव की आशंका जताई है, हालांकि सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ़ होगा।


गांवों में पसरा मातम, हर आंख नम

चारों युवकों की मौत की खबर जैसे ही सीबीगंज और बंडिया गांवों में पहुंची, दोनों इलाकों में कोहराम मच गया। परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल है।
हसीब की बहन बेसुध हो गई, तो मोहसिन की मां को दिल का दौरा पड़ने की आशंका के चलते डॉक्टर बुलाना पड़ा। अंकित की मां पूनम का रो-रोकर बुरा हाल है।


नौकरी की तलाश में दिल्ली गए थे, लाश बनकर लौटे

ये चारों युवा एसी रिपेयरिंग का काम करते थे। बेरोजगारी और आजीविका की मजबूरी ने इन्हें महानगर की ओर धकेला, लेकिन किस्मत इतनी बेरहम निकली कि घर लौटे तो कंधे पर नहीं, कंधे पर लादे गए।
यह हादसा फिर से शहरों में काम करने आए मजदूरों की बदहाल और असुरक्षित जिंदगी पर सवाल खड़े करता है।


जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

दिल्ली पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और कमरे की फॉरेंसिक जांच भी करवाई जा रही है। गैस रिसाव किस स्रोत से हुआ, यह स्पष्ट नहीं है।
मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है और शवों को जल्द उनके गृह जनपद बरेली भेजा जाएगा।


यह हादसा सिर्फ एक गैस रिसाव नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता, प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा और बेरोजगारी की गूंगी चीख भी है।

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