मुंबई पर छिड़ा भाषायी संग्राम: राज ठाकरे की धमकी पर निशिकांत दुबे का पलटवार – बोले, ‘मुंबई मराठियों की नहीं, गुजरातियों की है’

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के बीच जुबानी जंग तीखी होती जा रही है। राज ठाकरे द्वारा हाल ही में दी गई “समुद्र में डुबो-डुबो कर मारने” की धमकी के जवाब में सांसद दुबे ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मुंबई मराठियों की नहीं, बल्कि गुजरातियों की है।
राज ठाकरे ने शुक्रवार को एक जनसभा में निशाना साधते हुए दुबे को खुलेआम चेतावनी दी थी कि यदि वे मुंबई आए, तो उन्हें समुद्र में डुबो-डुबो कर मारा जाएगा। इस पर पलटवार करते हुए दुबे ने कहा कि, “आपको हिंदी से दिक्कत है, लेकिन अंग्रेजों की अंग्रेजी पढ़ने में शर्म नहीं आती। त्रिभाषा फार्मूले में अंग्रेजी स्वीकार्य है, लेकिन राष्ट्रभाषा हिंदी पर विरोध का डंका क्यों?”
दुबे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “मुंबई पहले गुजरात का हिस्सा थी, न कि महाराष्ट्र का। 1956 में भाषायी आधार पर राज्य विभाजन हुआ, तब जाकर मुंबई महाराष्ट्र का हिस्सा बनी। आज भी मुंबई में सिर्फ 31–32% मराठी भाषी हैं, जबकि हिंदी भाषी भी लगभग उतनी ही संख्या में हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, “2% भोजपुरी, 12% गुजराती, 3% तेलुगु, 3% तमिल, 2% राजस्थानी और 1–12% उर्दू भाषी लोग भी मुंबई में रहते हैं।”
सांसद दुबे ने तंज कसते हुए कहा, “मैंने राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी क्या?” उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा, “अगर मारने की इतनी हिम्मत है, तो उर्दू, तमिल, तेलुगु बोलने वालों को भी मारकर दिखाओ।”
अब देखना यह है कि मुंबई की राजनीति में बढ़ता यह भाषायी तनाव आगे क्या रूप लेता है। राज ठाकरे की चेतावनी और निशिकांत दुबे का तीखा पलटवार राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सनसनी पैदा कर रहा है।
