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वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की पहल, औरंगाबाद में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने की मांग

औरंगाबाद : वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल की गई। गुरुवार को AIMPLB के प्रतिनिधिमंडल ने औरंगाबाद के विभागीय आयुक्त दिलीप गावडे से मुलाकात की और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए संशोधित वक्फ अधिनियम को निरस्त करने की मांग की। इस अवसर पर AIMPLB के संयोजक मौलाना मुफ्ती मोइज़ुद्दीन क़ासमी की अगुवाई में अनेक मुस्लिम धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

क्या कहा गया ज्ञापन में:
ज्ञापन में बताया गया कि हाल ही में वक्फ अधिनियम 1995 में जो संशोधन किए गए हैं, वे न सिर्फ भेदभावपूर्ण हैं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 25, 26 और 29 (धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता) का भी उल्लंघन करते हैं।
इन संशोधनों के जरिए:

  • मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं को पूर्व में प्राप्त संरक्षण और कानूनी सुविधाएं समाप्त कर दी गई हैं,
  • जबकि हिंदू, सिख, बौद्ध और ईसाई संस्थाओं को पूर्ववत लाभ दिए जा रहे हैं।
  • पिछले 5 वर्षों से धार्मिक रूप से सक्रिय न होने वाले मुस्लिम व्यक्तियों से वक्फ के लिए दान लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है,
  • वक्फ भूमि से जुड़े मामलों का निपटारा अब न्यायालय के बजाय नामित अधिकारियों के हाथों में दे दिया गया है।
  • वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में सिर्फ मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है,
  • तथा चुनाव प्रक्रिया की जगह नामांकन प्रणाली लागू कर दी गई है।
  • अब वक्फ दानकर्ता के लिए संपत्ति की अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की शर्त लागू की गई है,
    जिससे वक्फ का दर्जा भी विवाद में पड़ सकता है।

मांग:
AIMPLB ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर हस्तक्षेप करें और केंद्र सरकार को इन असंवैधानिक व भेदभावपूर्ण संशोधनों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की सलाह दें।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख व्यक्ति:
इस ज्ञापन को तहाफ़्ज़-ए-औक़ाफ़ तहरीक के संयोजक मौलाना मुफ्ती मोइज़ुद्दीन क़ासमी, सह-संयोजक मौलाना महफूज़-उर-रहमान फारूकी, मौलाना इलियास खान फलाही, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हाफिज अब्दुल अज़ीम, जमात-ए-इस्लामी के नासिर जोहरी, मौलाना मुफ्ती नासिर, मौलाना नईम क़ासमी, तंजीम आइमा मसाजिद के अध्यक्ष हाफिज इक्बाल अंसारी, और मुस्लिम नुमाइंदा काउंसिल के सचिव यासिर सिद्दीकी जैसे प्रमुख नेताओं ने हस्ताक्षर किया।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति:
इस मौके पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के औरंगाबाद शहराध्यक्ष ख्वाजा शरफोद्दीन, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इब्राहिम पठान, वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रवक्ता तय्यब जफर, भारत मुक्ती मोर्चा के संतोष साळवे, दिलीप शिंदे, और बुद्धिस्ट इंटरनॅशनल संगठन के विश्वजीत गुनाटकर समेत कई स्थानीय धार्मिक और राजनीतिक प्रतिनिधि मौजूद थे।

इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि मुस्लिम समाज वक्फ अधिनियम में हुए बदलावों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और वे अपने धार्मिक अधिकारों के संरक्षण के लिए संगठित रूप से आवाज़ उठा रहे हैं।

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