मुस्लिम धर्मगुरुओं का बड़ा बयान – ‘लव जिहाद इस्लाम में हराम’, भोपाल केस में आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए कथित लव जिहाद मामले पर अब मुस्लिम धर्मगुरु सामने आए हैं। उन्होंने इस घटना की खुलकर निंदा की है और कहा है कि इस्लाम में बुराई और जबरदस्ती के लिए कोई स्थान नहीं है। साथ ही आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
भोपाल के शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अबुल कलाम कासमी ने इस प्रकरण को लेकर अपना वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम एक पाक और अनुशासित धर्म है, जिसमें लव जिहाद जैसी किसी भी चीज़ की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लव जिहाद जैसी कोई संज्ञा इस्लाम में नहीं है और इसका इस्तेमाल इस्लाम को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
शहर काजी नदवी ने कहा, “इस्लाम में अच्छे कार्यों को बढ़ावा देने के प्रयासों को ही जिहाद कहा जाता है, न कि किसी बुराई को। किसी भी प्रकार की जबरदस्ती, धोखाधड़ी या गुनाह इस्लाम में हराम है। गैर-महरम को देखना तक गुनाह के दायरे में आता है, ऐसे में जिना जैसे गंभीर अपराध की इस्लाम में सख्त सज़ा है।”
उन्होंने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि कुछ लोग धर्म के नाम पर ऐसे काम करके इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इस्लाम से अनजान हैं और अपने आचरण से खुद को भी बर्बाद कर रहे हैं।
शहर मुफ्ती अबुल कलाम कासमी ने भी कहा कि जो लोग गैर-महरम को देखना या उससे संबंध बनाना सही ठहरा रहे हैं, वे इस्लामिक शिक्षाओं के खिलाफ हैं और उन्हें सख्त सज़ा दी जानी चाहिए।
इसके साथ ही दोनों धर्मगुरुओं ने मीडिया से अपील की कि बिना पुख्ता जांच के किसी भी धर्म से जुड़ी संवेदनशील खबरों का प्रसारण न करें ताकि देश और प्रदेश की अमन-शांति बनी रहे।
धर्मगुरुओं का स्पष्ट संदेश है – इस्लाम का नाम लेकर किए गए अपराधों को धर्म से जोड़ना गलत है और दोषियों को कानून के तहत कठोर सज़ा मिलनी चाहिए।
