“मिस वर्ल्ड में वेश्या जैसा महसूस कराया गया” – मिस इंग्लैंड मिला मैगी का सनसनीखेज आरोप, स्पॉन्सर्स से मेलजोल का था दबाव
मिस वर्ल्ड 2025: हैदराबाद में हो रहे आयोजन पर विवाद, मिस इंग्लैंड मिला मैगी ने लगाए गंभीर आरोप

हैदराबाद: मिस वर्ल्ड 2025 प्रतियोगिता इन दिनों विवादों में घिर गई है। आयोजन स्थल हैदराबाद में 31 मई को होने वाले फिनाले से पहले ही मिस इंग्लैंड मिला मैगी ने प्रतियोगिता बीच में ही छोड़ दी और आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाकर तहलका मचा दिया है। इंग्लैंड के अखबार द सन को दिए एक इंटरव्यू में मिला ने आरोप लगाया कि उन्हें पेजेंट में “वेश्या जैसा महसूस” कराया गया और उनसे शो में भाग लेने वाले बड़े उम्र के फाइनेंशियल स्पॉन्सर्स से मेलजोल बढ़ाने का दबाव डाला गया।
मिला मैगी 7 मई को हैदराबाद पहुंचीं थीं लेकिन 16 मई को उन्होंने आयोजन बीच में ही छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में शामिल 109 कंटेस्टेंट्स को लगातार हैवी मेकअप और भारी गाउन पहनने को मजबूर किया गया, यहां तक कि उन्हें नाश्ते के समय भी सजधज कर रहने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा, “हर टेबल पर 6 गेस्ट और 2 लड़कियों को बैठाया जाता, और हमें कहा जाता कि उन्हें खुश रखें। मैं यहां हंसने-खिलखिलाने या एंटरटेन करने नहीं आई हूं। मुझे ऐसा महसूस कराया गया जैसे मैं वेश्या हूं।”
मिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब कुछ प्रतिभागियों ने सामाजिक मुद्दों पर बात करने की कोशिश की, तो उन्हें “बोरिंग” कहकर डांट दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पेजेंट का माहौल महिलाओं को केवल मनोरंजन की वस्तु के रूप में दिखाता है।
आयोजकों का खंडन
मिस वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन की सीईओ जूलिया मोर्ले ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मिला मैगी ने अपनी मां की तबीयत खराब होने के कारण प्रतियोगिता छोड़ने का फैसला किया था और संगठन ने उनकी मदद भी की थी। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ ब्रिटिश मीडिया आउटलेट्स ने झूठी और अपमानजनक खबरें चलाई हैं, जिनमें कोई सच्चाई नहीं है।
नंदिनी गुप्ता कर रहीं भारत का प्रतिनिधित्व
मिला मैगी के हटने के बाद अब इंग्लैंड की रनर-अप चार्लेट ग्रांट उनकी जगह लेंगी। वहीं, भारत की ओर से कोटा, राजस्थान की नंदिनी गुप्ता मिस वर्ल्ड 2025 में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक समाज में भी महिलाओं को उनकी पहचान की बजाय एक वस्तु के रूप में क्यों देखा जाता है — चाहे वो किसी भी क्षेत्र में क्यों न हों।
