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साइबर क्राइम पर ऐतिहासिक फैसला: कल्याणी अदालत ने नौ साइबर ठगों को सुनाई उम्रकैद, एक करोड़ की डिजिटल ठगी का था मामला

पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले के कल्याणी में शुक्रवार को इतिहास रचते हुए एक अदालत ने साइबर क्राइम के मामले में पहली बार नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला देशभर में साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

इन सभी दोषियों ने पिछले वर्ष रानाघाट के एक निवासी को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ की धमकी देकर एक करोड़ रुपये ठग लिए थे। कोर्ट ने इस मामले को ‘आर्थिक आतंकवाद’ की संज्ञा देते हुए सख्त रुख अपनाया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 338 (दस्तावेजों की जालसाजी) सहित कुल 11 धाराओं के तहत सजा सुनाई।

कल्याणी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुबर्थी सरकार ने गुरुवार को ही सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था। सजा पाने वालों में महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात के आरोपी शामिल हैं, जिनमें एक महिला भी है। यह सभी एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा थे, जिसने देश के विभिन्न हिस्सों में अब तक 108 लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की है।

डिजिटल सबूतों से खुला रैकेट का राज
CID के IG अखिलेश कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि पुलिस ने डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों को ट्रैक कर गिरफ्तार किया। छापेमारी में भारी मात्रा में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए। चार राज्यों से 29 गवाहों ने अदालत में बयान दिए, जिनमें पुलिस अधिकारी और कई बैंक प्रबंधक शामिल थे। पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट 2600 पन्नों की थी।

‘आर्थिक आतंकवाद’ का रूप ले चुके हैं ऐसे अपराध
विशेष लोक अभियोजक बिवास चटर्जी ने अदालत में जोर देते हुए कहा कि यह केवल साइबर ठगी नहीं, बल्कि आर्थिक आतंकवाद है। उन्होंने बताया कि गिरोह ने एक रिटायर्ड प्रोफेसर और राज्य सरकार के सेवानिवृत्त इंजीनियर सहित कई लोगों की जीवनभर की कमाई लूट ली। कुछ पीड़ितों को अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ीं और आश्रम में शरण लेनी पड़ी।

साइबर अपराध के खिलाफ मील का पत्थर साबित होगा यह फैसला
यह फैसला न केवल पीड़ितों के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि अब डिजिटल अपराधों पर कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा। बचाव पक्ष ने इशारा किया है कि वे इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देंगे, लेकिन फिलहाल देश की न्याय व्यवस्था ने साइबर अपराधियों को सख्त सबक सिखाने की दिशा में पहला ऐतिहासिक कदम बढ़ा दिया है।

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