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चीन के अतिक्रमण पर चुप्पी, तुर्की पर बयानबाज़ी? कांग्रेस ने पीएम से मांगा जवाब

तुर्की और अजरबैजान पर बहस के बीच कांग्रेस का पलटवार—कहा, विदेश नीति तय करना सरकार का काम है, विपक्ष का नहीं

कांग्रेस ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि किसी भी देश के साथ संबंध बनाना या उन्हें समाप्त करना सरकार का अधिकार है, विपक्ष का नहीं। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री एस जयशंकर से यह स्पष्ट करने की मांग की कि जब चीन भारतीय क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण कर रहा है, तब मोदी सरकार उससे सामान्य रिश्ते क्यों बनाए रखे हुए है।

यह बयान बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की ओर से एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दी गई उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने तुर्की और अजरबैजान को पाकिस्तान के साथ खड़े होने पर “आतंकी राष्ट्रों का समर्थक” करार दिया था और इन देशों के साथ व्यापार और पर्यटन का बहिष्कार करने की मांग उठाई थी।

कांग्रेस ने पूछा– क्या भारत ने तुर्की से सभी संबंध तोड़ दिए हैं?

अमित मालवीय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यदि बीजेपी इस तरह का सवाल उठा रही है, तो प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री को सामने आकर देश को बताना चाहिए कि क्या भारत सरकार ने तुर्की के साथ सभी राजनयिक और व्यापारिक संबंध समाप्त कर दिए हैं? क्या भारत में तुर्की का दूतावास बंद हो गया है?

उन्होंने आगे कहा कि विदेश नीति सरकार का विषय है, विपक्ष का नहीं। ऐसे में विदेश मंत्रालय को ही इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

‘चीन के अतिक्रमण पर चुप क्यों है सरकार?’ – जयराम रमेश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री को यह भी बताना चाहिए कि आखिर क्यों चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में लगातार हो रहे अतिक्रमण के बावजूद सरकार उससे सामान्य संबंध बनाए हुए है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने 19 जून 2020 को चीन को क्लीन चिट क्यों दी और देश को गुमराह कर राष्ट्रीय हितों को नुकसान क्यों पहुंचाया?

जयराम रमेश ने कहा, “क्या यही वह राष्ट्रवाद है, जिसकी बातें बीजेपी हर बार चुनावों में करती है?”

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस ने साफ किया है कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय रिश्ते देश की संप्रभुता से जुड़े विषय हैं और सरकार को इस पर पारदर्शिता से जवाब देना चाहिए, न कि विपक्ष पर सवाल उठाकर ध्यान भटकाना चाहिए।

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