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खजुराहो मंदिर से लेकर ट्राइबल जमीन तक, सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर व्यापक बहस

नई दिल्ली: वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच के सामने केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखते हुए अंतरिम आदेश दिए जाने का विरोध किया।

‘वक्फ पर अंतरिम रोक खतरनाक होगी’

तुषार मेहता ने तर्क दिया कि यदि कोर्ट अंतरिम आदेश देकर वक्फ कानून को स्थगित करता है और इस दौरान कोई संपत्ति वक्फ घोषित हो जाती है, तो उसे वापस पाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, “वक्फ अल्लाह का होता है। एक बार वक्फ घोषित हो जाने के बाद, उसे पलटना आसान नहीं होता।”

‘वक्फ और दान में अंतर’

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि वक्फ बनाना और वक्फ को दान देना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ के दुरुपयोग की आशंका के चलते मुसलमानों के लिए पांच साल की धार्मिक प्रैक्टिस की शर्त रखी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं है – “यदि मैं हिंदू होते हुए भी वक्फ में दान देना चाहूं, तो ऐसा संभव है।”

‘वक्फ अपने आप में एक राज्य है’

तुषार मेहता ने ट्राइबल क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कोई बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता, लेकिन वक्फ करने पर मुतवल्ली को पूर्ण अधिकार मिल जाता है। उन्होंने इसे “खतरनाक प्रवृत्ति” बताया और कहा कि वक्फ को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ माना गया है, इसलिए यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि केवल मुसलमानों को ही इससे लाभ होगा।

2013 के संशोधन पर भी सवाल

सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि 2013 के आम चुनावों से ठीक पहले कानून में संशोधन कर किसी को भी वक्फ करने की अनुमति दे दी गई थी, जबकि इससे पहले केवल मुसलमानों को ही यह अधिकार था। मेहता ने इसे “राजनीतिक उद्देश्य से किया गया संशोधन” करार दिया।

खजुराहो मंदिर का उदाहरण

इससे पहले मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई बीआर गवई ने खजुराहो मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह मंदिर ASI संरक्षित है और फिर भी वहां पूजा होती है। इस पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि नया कानून स्पष्ट करता है कि ASI संरक्षित किसी भी संपत्ति को वक्फ नहीं घोषित किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में इस संवेदनशील मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में यह फैसला देश में धार्मिक संपत्तियों को लेकर दिशा तय कर सकता है।

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