अहमदाबाद में बुलडोजर कार्रवाई: 8000 मुसलमानों के घरों को किया जाएगा जमींदोज, अतिक्रमण के खिलाफ अभियान या सांप्रदायिक निशाना?

अहमदाबाद के चंदोला झील इलाके में इन दिनों एक बार फिर बुलडोजर गरज रहे हैं। मंगलवार सुबह से शुरू हुए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान में नगर निगम ने तीन दिन के भीतर करीब 8000 मकानों और अन्य अवैध ढांचों को गिराने की योजना बनाई है। इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा बुलडोजर लगे हैं और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। 3000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी विरोध या हिंसा को रोका जा सके।
नगर निगम और पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह अवैध निर्माणों के खिलाफ है। अधिकारियों के मुताबिक, चंदोला झील के किनारे बनी ये बस्तियां सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई थीं, और इनमें बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे थे।
अप्रैल के अंत में शुरू हुए पहले चरण के अभियान में 1.5 लाख वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था। अब दूसरे चरण में 2.5 लाख वर्ग मीटर जमीन को खाली कराया जा रहा है। नगर निगम ने बताया कि अप्रैल में भी करीब 70 ‘अर्थमूवर’ और 200 डंपरों की मदद से बस्तियों को गिराया गया था।
अहमदाबाद पुलिस के मुताबिक, कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जांच एजेंसियां सतर्क हुईं। 26 अप्रैल को पुलिस ने चंदोला झील क्षेत्र में छापा मारा और यहां से 150 से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। इस पूरे नेटवर्क के पीछे लालू पठान उर्फ लल्लू बिहारी नाम के शख्स को ‘मास्टरमाइंड’ बताया जा रहा है, जो इन लोगों को किराये पर मकान दिलवाने और नकली दस्तावेज़ तैयार करवाने में मदद करता था।
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई एकतरफा है और इसके पीछे सांप्रदायिक सोच हो सकती है। उनका कहना है कि क्या वाकई सभी बस्तियों में केवल बांग्लादेशी ही रहते हैं, या फिर मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर यह कार्रवाई की जा रही है?
सरकार और प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल अवैध निर्माण और अवैध घुसपैठ के खिलाफ है, धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है। लेकिन जिन हजारों परिवारों के सिर से छत छीन ली गई, उनके लिए सवाल यह भी है कि क्या उनकी नागरिकता की जांच निष्पक्ष तरीके से हुई या वे एक बड़े सुरक्षा अभियान के नाम पर बलि का बकरा बने?
फिलहाल, चंदोला की झील के किनारे धूल और मलबे के ढेर हैं। जिन घरों में कल तक चूल्हा जलता था, वहां आज खामोशी पसरी है। प्रशासन कार्रवाई को जरूरी बता रहा है, लेकिन इसके सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर बहस तेज हो गई है।
