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आदर्श शिक्षक शेख अब्दुल रहीम: विद्यार्थियों और शिक्षकों के हक़ के लिए लड़ने वाला प्रेरणादायी और बहुआयामी व्यक्तित्व

लोणार: (प्रतिनिधि–फ़िरदोस ख़ान पठान)

लेखक: मोहम्मद असलम परवेज़
(MA-B.Ed, BA-{D.Ed, DSM (School Management), DJMC (Journalism), UGC-NET})
न.प. उर्दू उच्च प्राथमिक शाला, लोणार – बुलढाणा
मो. 9922897475


प्रारंभिक परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि

शिक्षा और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने परिश्रम, त्याग और संघर्ष से न सिर्फ़ अपना जीवन बनाते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी आशा और प्रेरणा का मार्ग तैयार करते हैं। ऐसे ही तेजस्वी व्यक्तित्वों में शेख अब्दुल रहीम सर का नाम उल्लेखनीय है।

उनका जन्म औरंगाबाद जिले के सिल्लोड तालुका में एक सुस्थित, परंतु परिश्रमी परिवार में हुआ। उनके पिता शेख बाबू शेख अय्यूब (पूर्व नगरसेवक) समाजाभिमुख, उदार और समाजसेवी व्यक्तित्व हैं। उनकी माता श्रीमती आबिदा बी एक सुसंस्कृत, धार्मिक और सोज्वळ प्रवृत्ति की महिला हैं, जिन्होंने बच्चों के संस्कार और शिक्षा में कभी कमी नहीं रखी। घर में धार्मिक मूल्य और समाजसेवा का माहौल हमेशा रहा, जिससे उनके व्यक्तित्व को संतुलित, सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण दिशा मिली। वे हमेशा अपने सफलता का श्रेय माता-पिता की शिक्षा प्रेरणा और आशीर्वाद को देते हैं।


शैक्षणिक यात्रा

शेख अब्दुल रहीम सर ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा नेशनल उर्दू प्राथमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय, सिल्लोड में पूरी की। इसके बाद उन्होंने मौलाना मोहम्मद अली जौहर उर्दू जूनियर साइंस कॉलेज, सिल्लोड से उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और उत्कृष्ट सफलता हासिल की।

इसके बाद उन्होंने यशवंतराव चव्हाण कॉलेज, सिल्लोड से बी.एससी. की डिग्री प्राप्त की। लेकिन उनका उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं था, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाजहित और सामुदायिक प्रगति की राह खोलना था। इसी सोच के साथ उन्होंने शिक्षक व्यवसाय को अपनाया। आगे चलकर मौलाना मोहम्मद अली जौहर उर्दू डी.एड कॉलेज, सिल्लोड से डी.एड पूरा किया और अध्यापन क्षेत्र में सक्रिय हो गए।


विद्यार्थी जीवन का संघर्ष

छात्र जीवन से ही वे सहपाठियों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। जहां अधिकांश युवा केवल अपने तक सीमित रहते हैं, वहीं उन्होंने छात्रवृत्ति, शालेय सुविधाओं और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के लिए लगातार प्रयास किए। इससे उनकी छवि एक सहृदय, नेतृत्वगुणों से परिपूर्ण और सहपाठियों का दिल जीतने वाले व्यक्ति की बनी।

उन्होंने अपने साथियों को केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, खेल और सामाजिक कार्यों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यही भाव उनके भविष्य के समाजसेवा कार्य का मजबूत आधार बना।


अध्यापन जीवन की शुरुआत

शिक्षण पूरा होने के बाद शेख अब्दुल रहीम सर ने शिक्षक के रूप में करियर शुरू किया। उनके लिए शिक्षक केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन है। वे केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों के नैतिक और सामाजिक निर्माण को भी अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

कक्षा में वे मार्गदर्शक, मित्र और सलाहकार के रूप में विद्यार्थियों के साथ रहते हैं। आधुनिक अध्यापन पद्धतियों का उपयोग कर उन्होंने छात्रों में शिक्षा के प्रति जिज्ञासा और उत्साह पैदा किया।


विद्यार्थी और शिक्षक के लिए सेवा

अध्यापन के साथ-साथ उन्होंने अपने कार्य को समाज तक पहुँचाया। उन्होंने कई कार्यशालाएँ, संगोष्ठियाँ और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए। विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नि:शुल्क शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई। वहीं शिक्षकों के लिए आधुनिक अध्यापन तकनीक और पद्धति पर प्रशिक्षण दिए।

उनकी सोच है कि शिक्षक-विद्यार्थी संबंध विश्वास और आपसी लगाव पर आधारित होने चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उनकी दी गई कई सुझावों की सफलतापूर्वक अमल भी हुआ।


हैप्पी टू हेल्प फाउंडेशन – सेवा का उज्ज्वल अध्याय

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का सुविचार है –
“अगर आप सिर्फ अपने लिए जी रहे हैं, तो आप समाज के लिए एक ज़िंदा लाश हैं।”

इसी विचार से प्रेरणा लेकर उन्होंने हैप्पी टू हेल्प फाउंडेशन की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से गरीब विद्यार्थियों को किताबें, बैग, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक साधन उपलब्ध कराए जाते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर और जनजागृति अभियान सफलतापूर्वक चलाए जाते हैं।

संस्था का विशेष कार्य यह है कि केवल मदद तक सीमित न रहकर, लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस संस्था की पहचान केवल सिल्लोड और संभाजीनगर तक सीमित न रहकर पूरे महाराष्ट्र में बनी है।


विशेष ध्येय और उपलब्धियाँ

उनका एक बड़ा सपना है कि प्रत्येक विद्यार्थी को सौ प्रतिशत पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने प्रयासों से अनेक छात्रों को नि:शुल्क किताबें और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई।

उनके प्रयासों से मुस्लिम छात्राओं को बुरखा पहनकर बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति मिलना एक बड़ी उपलब्धि रही। यह सफलता न केवल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी रही। इसके अलावा उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा के अवसर दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


व्यक्तिगत गुण

शेख अब्दुल रहीम सर का व्यक्तित्व ईमानदारी, नम्रता, धैर्य और दृढ़ता का अद्भुत संगम है। कठिन परिस्थितियों में भी साहस न छोड़ना और निस्वार्थ भाव से कार्य करना उनका स्वभाव है। उनका सौम्य व्यवहार, विनम्रता और आपुलकी का स्वभाव हर किसी को उनसे जोड़ देता है।

उनके सतत सामाजिक और शैक्षणिक प्रयासों के चलते उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों पुरस्कार मान्यवरों और अधिकारियों के हाथों प्राप्त हुए हैं।


भविष्य की योजनाएँ

उनकी इच्छा है कि हैप्पी टू हेल्प फाउंडेशन महाराष्ट्र में शैक्षणिक और सामाजिक परिवर्तन का आदर्श स्तंभ बने। वे चाहते हैं कि शिक्षकों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध हों, ताकि नई पीढ़ी समय की जरूरत के मुताबिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पा सके।

उनका सपना है कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण के संस्कार भी मिले, जिससे शिक्षा एक सामाजिक आंदोलन बनकर अज्ञान और पिछड़ापन दूर कर सके।


निष्कर्ष और संदेश

शेख अब्दुल रहीम सर के जीवन से यह सीख मिलती है कि अगर उद्देश्य ऊँचा और नीयत शुद्ध हो, तो सीमित साधन भी सफलता की सीढ़ी बन सकते हैं। उनका संदेश साफ़ है –
“शिक्षा प्रकाश की किरण है और इस प्रकाश को समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।”

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