जालना में जामियातुल मुह्सिनात में सीरतुन-नबी ﷺ का शानदार जलसा, बच्चियों ने की प्रभावी प्रस्तुतियाँ

जालना/कादरी हुसैन
जमीयत उलेमा अरशद मदनी ज़िला जालना की सीरत पाक मुहिम के तहत जामियातुल मुह्सिनात, पेंशनपुरा जालना में 17 सितंबर, बुधवार सुबह 10 बजे जलसा-ए-सीरतुन-नबी ﷺ का शानदार आयोजन किया गया। कार्यक्रम की सदारत मौलाना सैयद नसरुल्लाह हुसैनी सुहैल नदवी (नायब सदर जमीयत उलेमा अरशद मराठवाड़ा) ने की।
जलसे की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन और नात शरीफ से हुई। इसके बाद मदरसे की छात्राओं ने सीरत-ए-नबी ﷺ के विभिन्न पहलुओं पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किए। बच्चियों की ज्ञानवर्धक और उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों को सुनकर दर्शकों ने संस्था की शैक्षणिक गुणवत्ता की सराहना की।

मौलाना ईसा खान काशिफी ने बच्चियों की शानदार प्रस्तुतियों पर खुशी जताते हुए शिक्षण स्टाफ को मुबारकबाद दी। संस्था की सदर मुअल्लिमा ने संस्था के शैक्षणिक और तर्बीयती माहौल पर रोशनी डालते हुए कहा कि सीरत पाक मुहिम का उद्देश्य बच्चों को अपने रसूल ﷺ की पाक तालीमात और उनके आदर्श जीवन से जोड़ना है, जो आज के समय की सबसे अहम ज़रूरत है।
अता मोहम्मद बख्शी (रुक्न जमीयत उलेमा) ने पहली बार संस्था का दौरा किया और बच्चियों की तालीम व तर्बीयत देखकर संतोष व्यक्त किया। मौलाना सैयद नसरुल्लाह हुसैनी सुहैल नदवी ने सदारती खिताब में कहा कि नबी करीम ﷺ से मोहब्बत और अकीदत ही मुसलमानों की असली कामयाबी है। उन्होंने छात्राओं को नसीहत करते हुए कहा कि नबी ﷺ की सीरत और तालीमात को अपनी जिंदगी का नमूना बनाएं और हर अमल उसी के मुताबिक करें।
कार्यक्रम में हाफ़िज़ क़ारी मोहम्मद मुआज़ साहब (रुक्न जमीयत उलेमा) ने पुरसोज़ अंदाज़ में नात शरीफ पेश की। तक़रीरी मुकाबले में आशिरा बिंत मुफ़्ती अब्दुर्रहमान (दरजा अव्वल) और सारा बिंत ख़ालिद (दरजा दोम) ने सफलता हासिल की। विजेताओं को आगामी अंतिम जलसे में इनाम दिए जाएंगे।
इस जलसे ने साबित कर दिया कि मदरसों की बच्चियाँ सिर्फ़ तालीम ही नहीं, बल्कि इल्मी और तर्बीयती मंचों पर भी अपनी पहचान मजबूती से पेश कर रही हैं।
