महाराष्ट्र में निकाय चुनावों की उलटी गिनती शुरू, औरंगाबाद में फिर से चुने जाएंगे जन–प्रतिनिधि

औरंगाबाद/प्रतिनिधि
महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, चुनावी बिगुल नवंबर महीने से बजने जा रहा है और जनवरी के अंत तक सभी नगरपालिका, नगरपंचायत, जिला परिषद और महापालिकाओं के चुनाव संपन्न कर लिए जाएंगे। इसके बाद राज्यभर में जनप्रतिनिधियों का शासन शुरू होगा।
सूत्रों के अनुसार, नवंबर में नगरपालिका और नगरपंचायत के चुनाव होंगे, उसके बीस दिन बाद जिला परिषद के चुनाव और फिर अगले बीस दिनों में महापालिका चुनाव आयोजित किए जाएंगे। यानी हर बीस दिन पर एक चुनावी कार्यक्रम घोषित होगा। दिवाली के बाद उम्मीदवारों की तैयारी में तेजी आने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि जनवरी 2026 के अंत तक सभी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव पूरे किए जाएं। इसके बाद से राज्य चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी शुरू कर दी है। जिला परिषद चुनाव के लिए गट आरक्षण और अध्यक्ष पद की लॉटरी पहले ही निकाली जा चुकी है। वहीं, महापालिका चुनाव के लिए प्रभाग रचना तैयार कर मंजूर की जा चुकी है। अब जल्द ही वार्ड आरक्षण और महापौर पद के आरक्षण की घोषणा भी होने की संभावना है। नगरपालिका और नगरपंचायत चुनाव की तैयारी भी अंतिम चरण में है।
राजनीतिक दलों ने भी चुनावी मोर्चा संभाल लिया है। औरंगाबाद में शिवसेना ने गटप्रमुखों की बैठक लेकर संगठनात्मक समीक्षा की और नया केंद्रीय कार्यालय शुरू किया। भाजपा ने विभागीय बैठक आयोजित की, जिसमें उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं और पदवीधर मतदारसंघ चुनाव की तैयारियों का आढावा लिया। वहीं, शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) गट ने किसानों की समस्याओं को लेकर मोर्चा निकालकर सरकार पर दबाव बनाया।
भाजपा की बैठक में यह भी संकेत मिले कि नवंबर में नगरपालिका और नगरपंचायत के चुनाव होंगे, उसके बीस दिन बाद जिला परिषद और फिर बीस दिन बाद महापालिका चुनाव घोषित किए जाएंगे। इस तरह जनवरी के अंत तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
औरंगाबाद महापालिका अप्रैल 2020 में भंग कर दी गई थी, तब से यहां प्रशासक राज चल रहा है। यदि जनवरी के अंत तक चुनाव हो जाते हैं, तो लगभग पांच वर्ष नौ महीने बाद महापालिका में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का शासन फिर से स्थापित होगा।
