जालना में यौम-ए-इक़बाल पर इदारा-ए-अदब-ए-इस्लामी की शानदार अदबी महफ़िल, शायरों और विद्वानों ने पेश किए विचार और कलाम

जालना/कादरी हुसैन
इदारा-ए-अदब-ए-इस्लामी हिंद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शाखा जालना की ओर से यौम-ए-इक़बाल के मौके पर एक शानदार अदबी और इल्मी बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिनांक 8 नवम्बर, शनिवार की रात नमाज़-ए-ईशा के बाद कार्यालय जमाअत-ए-इस्लामी, दुखी नगर क़दीम, जालना में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की पहली नथरी (गद्य) बैठक की अध्यक्षता प्रोफेसर अब्दुर्रहीम अरमान जालनवी ने की। इस सत्र में डॉ. खालिद मोहसिन और परवेज आलम ने अल्लामा इक़बाल की मशहूर नज़्मों “तुलू-ए-इस्लाम” और “ग़ुलाम क़ादिर रोहेला” पर शोधपूर्ण और प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किए। वहीं, “इक़बाल और शाहीन” विषय पर सेवानिवृत्त व्याख्याता एडवोकेट मोहम्मद अशफ़ाक़ काग़ज़ी ने मार्गदर्शन देते हुए इक़बाल की सोच और दर्शन को विस्तार से समझाया। अध्यक्षीय भाषण में प्रो. अब्दुर्रहीम अरमान ने इक़बाल की शायरी, कला और विचारधारा को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए सारगर्भित टिप्पणी की।
दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि क़ासिम क़ालिब जालनवी ने की। इस मौके पर स्थानीय शायरों — नईम ख़ान नईम, ताहिर हुसैन ताहिर, फ़ैज़ सुबहानी, ख़िज़र राही और अब्दुर्रज़ाक़ रहबर — ने अपने अशआर पेश कर महफ़िल को चार चाँद लगा दिए।
कार्यक्रम का समापन दुआएं और इक़बाल की शिक्षाओं को आत्मसात करने के आह्वान के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों और श्रोताओं ने इसे एक यादगार अदबी शाम करार दिया।
