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जालना नगर निगम में अनियमितताओं और वित्तीय घोटालों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने मांगी विस्तृत जांच रिपोर्ट

जालना/कादरी हुसैन

जालना नगर निगम में हुए कथित वित्तीय घोटालों और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी कार्यालय (नगर पालिका प्रशासन विभाग) ने नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।

यह कार्रवाई श्री साद बिन मुबारक द्वारा 28 अक्टूबर 2025 को दाखिल की गई लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में नगर निगम प्रशासन पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताएँ, ठेका घोटाले और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहे अवैध कार्यों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।


🔹 शिकायत के मुख्य बिंदु और आरोप

1. कोविड काल में चालान घोटाला :
कोरोना महामारी के दौरान बिना मास्क पाए जाने पर जुर्माना वसूली के लिए 395 रसीद पुस्तिकाएँ छपाई गई थीं, जिनमें से 51 पुस्तिकाएँ गायब हैं। 13 महीनों का हिसाब अब तक तहसील कार्यालय को नहीं दिया गया, जबकि तीन डुप्लीकेट पुस्तिकाओं का मामला भी सामने आया है। बावजूद इसके, उच्च अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

2. स्वच्छता विभाग में अव्यवस्था :
नगर निगम में 357 सफाईकर्मी और शुमी एजेंसी के माध्यम से 96 अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त हैं, फिर भी शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। आरोप है कि कई अधिकारी ‘मासिक हप्ता’ देकर अपने स्थान पर दूसरों से काम करवाते हैं।

3. शुमी एजेंसी ठेका घोटाला :
एजेंसी को हर माह ₹32 लाख से अधिक का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा। एजेंसी के 22 ट्रैक्टरों में कई बिना बीमा या वैध कागज़ात के हैं, जबकि कुछ निष्क्रिय पड़े हैं।

4. कार्यालय में चोरी और एजेंटों का दबदबा :
नगर निगम कार्यालय में बार-बार चोरी की घटनाएँ हो रही हैं, सुरक्षा व्यवस्था नदारद है। नागरिकों के दस्तावेज़ों से जुड़े कार्यों में एजेंटों की सक्रियता बढ़ गई है।

5. सड़क निर्माण टेंडर घोटाला :
सड़क निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और ठेकेदारों से मिलीभगत के आरोप हैं। अधूरे नाले, टूटी सड़कें और न लगाई गई स्ट्रीट लाइटें इसका प्रमाण मानी जा रही हैं।

6. आयुक्त निवास पर अनधिकृत खर्च :
आयुक्त संतोष खांडेकर के सरकारी निवास पर टर्फ, टेनिस कोर्ट और बगीचा निर्माण पर लाखों रुपये नगर निगम निधि से खर्च किए गए हैं।

7. अतिक्रमण हटाने में निष्क्रियता :
2022 से लगातार शिकायतें होने के बावजूद बाजार चौक, भाजी मंडी, मिलन चौक और शनि मंदिर क्षेत्रों से अतिक्रमण नहीं हटाए गए। कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित रही।

8. एक अधिकारी के पास कई विभाग :
कई अधिकारियों को 2 से 4 विभागों का चार्ज दिया गया है, जिससे वित्तीय स्वार्थ और निर्णयों में पक्षपात की संभावना जताई गई है।

9. अवैध एसी इंस्टॉलेशन :
बिना शासन अनुमति के कई अधिकारियों के केबिनों में एसी लगवाए गए और इन पर मनमाने टेंडर जारी कर बिल निकाले गए।

10. निष्क्रिय ट्रैक्टर और स्थायी पदस्थापनाएँ :
नगर निगम द्वारा खरीदे गए 4 ट्रैक्टरों में केवल एक उपयोग में है, जबकि तीन बंद पड़े हैं। कई अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और उन्होंने बड़ी संपत्ति अर्जित की है।

11. सुरक्षा व्यवस्था की मांग :
नगर निगम कार्यालय में नागरिकों की भीड़ और दस्तावेज़ों की सुरक्षा को देखते हुए 24 घंटे पुलिस सुरक्षा की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।


🔹 जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश

इन सभी बिंदुओं पर जिलाधिकारी कार्यालय ने नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त को तीन दिनों के भीतर बिंदुवार और प्रमाण सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट में कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी, सफाईकर्मियों की सूची, ठेकेदारों का विवरण, विभागवार कार्यभार, सेवा अवधि और संबंधित वित्तीय दस्तावेज़ शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

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