नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव: हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश — सभी चुनावों के परिणाम अब 21 दिसंबर को ही घोषित होंगे, कल की मतगणना रद्द

मुंबई/नागपुर
राज्यभर में जारी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव प्रक्रिया को लेकर नागपुर खंडपीठ ने आज एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कुछ नगर परिषदों से जुड़े मामले अदालत में लंबित होने के कारण राज्य की करीब 20 नगर परिषदों के चुनाव 20 दिसंबर को कराने का निर्णय लिया गया था। इसी वजह से याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि सभी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के परिणाम एक ही दिन घोषित किए जाएँ, ताकि चुनाव परिणामों पर किसी तरह का असर न पड़े।
हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य की सभी नगर परिषद और नगर पंचायतों के परिणाम 21 दिसंबर को ही घोषित किए जाएँ। भले ही आज मतदान हो चुका है, लेकिन उसके नतीजे 21 दिसंबर को ही घोषित होंगे। साथ ही, एक्ज़िट पोल 20 दिसंबर को मतदान समाप्त होने के आधे घंटे बाद जारी किए जा सकेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि इन चुनावों की आदर्श आचारसंहिता 20 दिसंबर तक प्रभावी रहेगी।
उद्याची (कल की) मतमोजणी रद्द — अब प्रशासन पर क्या असर?
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद मतगणना आगे बढ़ा दी गई है, जिससे प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।
- प्रशासन को सभी ईवीएम मशीनें 21 दिसंबर तक स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखनी होंगी।
- राज्यभर में करीब 280 से अधिक मतगणना केंद्र और स्ट्रॉन्ग रूम 21 दिसंबर तक आरक्षित रखने पड़ेंगे।
- ईवीएम सुरक्षा के लिए लगातार पुलिस बंदोबस्त तैनात करना अनिवार्य होगा।
- चुनाव निर्णय अधिकारियों और चुनाव कर्मचारियों को प्रतिदिन स्ट्रॉन्ग रूम का निरीक्षण कर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है — यह प्रक्रिया अब 21 दिसंबर तक जारी रहेगी।
- विधानसभा चुनाव की तरह लगभग समान संख्या में मतगणना केंद्र होने के कारण प्रशासन पर भारी दबाव बढ़ेगा।
- सामान्यतः विधानसभा मतगणना मतदान के 1–2 दिन बाद होती है, लेकिन नगर परिषद चुनावों की मतगणना अब तीन सप्ताह तक सुरक्षा और प्रबंधन बनाए रखने जैसी चुनौती खड़ी कर देगी।
नई चुनावी समय-सारणी को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें
- जिन उम्मीदवारों को पहले जो चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए थे, प्रचार उसी आधार पर हुआ है। इसलिए नई प्रक्रिया में चुनाव चिन्ह बदले नहीं जाने चाहिए।
- चुनाव रद्द होने तक उम्मीदवारों ने काफी खर्च किया है। इसलिए खर्च की सीमा बढ़ाई जाए और पहले हुए खर्च को मान्यता दी जाए।
- 20 दिसंबर की मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक कोई भी एक्ज़िट पोल प्रकाशित न किया जाए।
हाईकोर्ट के इस निर्णय से प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ बढ़ गई हैं, जबकि उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
