चुनाव में मुकाबला हो, टकराव नहीं—वोट बेचना ज़मीर और भविष्य की नीलामी : फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स की कड़ी चेतावनी

जालना/कादरी हुसैन
महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों के बीच फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने एक सख़्त और भावनात्मक अपील जारी करते हुए जनता को आगाह किया है कि यह चुनाव केवल नगर निगम चुनने का नहीं, बल्कि शहर की इज़्ज़त, अमन, इंसाफ़ और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का फ़ैसला है। संस्था ने साफ़ शब्दों में कहा कि कुछ नोटों के बदले वोट बेचना केवल एक सौदा नहीं, बल्कि ज़मीर की नीलामी और बच्चों के हक़ से ग़द्दारी है।
फेडरेशन ने कहा कि महानगरपालिका चुनाव नालियों, सड़कों और पानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह तय करते हैं कि शहर में इंसाफ़ होगा या नाइंसाफ़ी, अमन होगा या नफ़रत, विकास होगा या लूट। इसलिए वोट भावनाओं, दबाव या लालच में नहीं, बल्कि सोच-समझकर दिया जाना चाहिए।
संस्था के ज़िम्मेदारों ने जनता से अपील की कि वोट उसी उम्मीदवार को दें जो ईमानदार हो, जनता के दर्द को समझता हो, जाति और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचे और सेवा को इबादत माने। उन्होंने चेतावनी दी कि जो आज वोट ख़रीदता है, वह कल शहर और संसाधन भी बेचने से नहीं हिचकेगा।
तेज़ होते चुनावी माहौल पर चिंता जताते हुए फेडरेशन ने कहा कि कई जगह पैसों का खुला खेल और नफ़रत फैलाने वाले भाषण सामने आ रहे हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि चुनाव में मुकाबला हो, लेकिन आपसी रंजिश और दुश्मनी न पनपे। राजनीतिक मतभेद को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलना शहर और समाज दोनों के लिए ख़तरनाक है। एकता, सहनशीलता और आपसी सम्मान ही समाज की असली ताक़त है।
वोट न देने वाले नागरिकों को भी कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि मतदान से दूर रहना ग़लत और भ्रष्ट लोगों को मौक़ा देना है। इसलिए हर हाल में वोट करें और अपने शहर की समस्याओं का समाधान करने वाले योग्य उम्मीदवार को चुनें। फेडरेशन ने जनता से यह संकल्प लेने की अपील की कि हम वोट अवश्य डालेंगे, वोट न बेचेंगे, न बिकने देंगे और शहर के भविष्य का सौदा नहीं करेंगे।
फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स की इस संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति पर मौलाना उमरीन महफ़ूज़ रहमानी, महमूद अहमद दरियाबादी, मौलाना हाफ़िज़ इलियास ख़ान फ़लाही, मौलाना हाफ़िज़ सैयद अतहर, मौलाना हलीमुल्लाह क़ासमी, फ़रीद शेख, मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी, डॉ. सईद अहमद फ़ैज़ी, हाफ़िज़ इक़बाल चूनावाला, मौलाना मुफ़्ती हुज़ैफ़ा क़ासमी, मौलाना आगा रूह ज़फ़र, मौलाना अनीस अशरफ़ी, मुफ़्ती अशफ़ाक़ क़ासमी, मौलाना निज़ामुद्दीन फ़ख़रुद्दीन, हुमायूं शेख और शेख़ अब्दुल मजीब सहित कई प्रमुख धार्मिक व सामाजिक हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम शामिल हैं।
