निकाह को आसान बनाने की मिसाल बना भोकरदन, इज्तेमाई शादियों से समाज को नया संदेश

भोकरदन/करीम लाला
दिखावे, फ़िज़ूलख़र्ची और दहेज की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच भोकरदन में आयोजित इज्तेमाई शादियों ने समाज के सामने सादगी और इस्लाही सोच की एक प्रभावशाली तस्वीर पेश की। 19 जनवरी 2026 को जामिया इस्लामिया फलाहे दारैयन, भोकरदन में इज्तेमाई निकाह का भव्य और अनुकरणीय आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम की सदारत हज़रत मौलाना नसीमुद्दीन साहब मिफ्ताही (औरंगाबाद) ने की, जबकि सरपरस्ती हज़रत मौलाना क़ारी अहमद अली साहब (अकलकुवा) की रही। पंच कमेटी भोकरदन, उलमा-ए-इकराम और तमाम ज़िम्मेदारान के संयुक्त प्रयास से यह आयोजन संपन्न हुआ।
उलमा-ए-इकराम ने अपने बयानात में कहा कि निकाह को सरल बनाना समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों से समाज को मुक्त किए बिना मज़बूत और स्वस्थ समाज की कल्पना अधूरी है। उन्होंने सुन्नत के मुताबिक़ सादगी से शादी करने और फ़िज़ूल रस्मों से बचने पर विशेष ज़ोर दिया।
इज्तेमाई शादियों और निकाह की तमाम रस्में ख़ैर-ओ-आफ़ियत और अमन के साथ पूरी हुईं। आयोजन को सफल बनाने में ज़िम्मेदारान, नौजवान कमेटी, मदरसा इंतिज़ामिया और भोकरदन वासियों की सामूहिक मेहनत और सहयोग उल्लेखनीय रहा।
अंत में नवविवाहित जोड़ों के लिए दुआ की गई कि अल्लाह तआला उनकी ज़िंदगी में सुकून, मोहब्बत और बरकत अता फरमाए और समाज में ऐसे नेक और सुधारात्मक कार्यक्रम निरंतर जारी रहें।
