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कोलू तेलचाणा सहकारी संघ को बड़ा झटका: 2014 का फेरफार रद्द कराने की अपील खारिज, रेस-जुडिकाटा लागू

जालना/कादरी हुसैन

जालना जिले में भूमि अभिलेख से जुड़े एक अहम प्रकरण में जिला अधीक्षक भूमि अभिलेख, जालना ने कोलू तेलचाणा सहकारी संघ की अपील को प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया। यह अपील मौजे शहर जालना स्थित भूमि सर्वे नंबर 10596/अ, 10596/3/1 एवं 10596/3/2 से संबंधित फेरफार क्रमांक 33992 (दिनांक 01 अप्रैल 2014) को रद्द कराने के लिए दायर की गई थी। इस संबंध में आदेश 16 जनवरी 2026 को पारित किया गया।

प्रकरण में अपीलकर्ता के रूप में कोलू तेलचाणा सहकारी संघ, जालना (अध्यक्ष: सखाराम बाबुराव मिसाळ, मार्फत कुलमुख्त्यार: गणेश उत्तमराय लुंट) शामिल था। संघ की ओर से दावा किया गया कि संस्था की स्थापना वर्ष 1957 में हुई है, इसके 450 सदस्य हैं और विवादित 441 वर्गमीटर भूमि पर संस्था का स्वामित्व व कब्जा है। संघ ने आरोप लगाया कि उक्त भूमि का अवैध पोट-विभाजन कर अन्य व्यक्तियों के नाम गलत तरीके से फेरफार दर्ज किए गए।

वहीं प्रतिवादी पक्ष के रूप में उप अधीक्षक भूमि अभिलेख, जालना चंद्रकांत प्रकाश मालोदे, श्रीराम कृष्णराव मालोदे, श्रीकृष्ण देवीदास मालोदे, मोबीन पहाण तथा संजय पंढरीनाथ मिसाळ ने जवाब दाखिल किया। प्रतिवादियों ने बताया कि संबंधित 198.71 वर्गमीटर भूमि विधिवत वितरण पत्र और पंजीकृत बक्षीस पत्र के आधार पर उनके नाम दर्ज हुई है। इसी आधार पर नगर परिषद से अनुमति लेकर निर्माण एवं व्यवसाय भी किया गया है।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इसी भूमि और फेरफार को लेकर वर्ष 2018 में कोलू तेलचाणा सहकारी संघ द्वारा दायर अपील आपसी तडजोड़ के आधार पर वापस ली जा चुकी थी। ऐसे में उसी विषय पर पुनः अपील दायर करना कानूनन मान्य नहीं माना गया। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व आदेश के पुनर्विलोकन की अनुमति सक्षम उच्च अधिकारी द्वारा पहले ही अस्वीकृत की जा चुकी है।

सभी तथ्यों, दस्तावेजों और पूर्व कार्यवाही पर विचार करते हुए जिला अधीक्षक भूमि अभिलेख ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान अपील पर रेस-जुडिकाटा (पूर्व में निर्णयित मामला) का सिद्धांत लागू होता है। इसी आधार पर महाराष्ट्र जमीन महसूल अधिनियम, 1966 की धारा 255(3) के तहत अपील को खारिज कर दिया गया।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि यह मामला किसी दीवानी न्यायालय में लंबित है, तो यह आदेश उसके अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। आदेश से असंतुष्ट पक्ष 90 दिनों के भीतर उपसंचालक भूमि अभिलेख, औरंगाबाद के समक्ष अपील दायर कर सकता है।

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