बाल मज़दूरी के खिलाफ तत्काल छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश— जिलाधिकारी आशिमा मित्तल

जालना/कादरी हुसैन
बाल एवं किशोर श्रमिकों के उन्मूलन हेतु राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक तीन माह की अवधि में पूरे देश में बचाव एवं पुनर्वास अभियान आयोजित किया गया है। इसके अंतर्गत जालना ज़िले में बाल एवं किशोर श्रमिकों तथा सड़क पर रहने वाले बच्चों की पहचान, उनकी मुक्ति तथा ज़िले के हॉट-स्पॉट चिन्हित कर छापेमारी अभियान आयोजित किए जाएंगे। इस हेतु पुलिस विभाग को बाल मज़दूरी उन्मूलन के लिए अपनी पूरी मशीनरी सक्रिय करने तथा बाल मज़दूरी के खिलाफ तत्काल छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने बैठक में दिए।
जिलाधिकारी कार्यालय के सभागृह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जालना ज़िला नकल-मुक्त अभियान एवं बाल श्रमिक खोज अभियान विषयक बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर निवासी उपजिलाधिकारी शशिकांत हदगल, पुलिस उपअधीक्षक रविंद्र निकाळजे, शिक्षा अधिकारी बालू खरात, ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी गजानन इंगळे सहित संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कहा कि बाल मज़दूरी प्रथा का समूल उन्मूलन कर बाल मज़दूरों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में काम पर रखना प्रतिबंधित है। बाल श्रमिकों की मुक्ति हेतु प्रतिदिन कार्रवाई अपेक्षित है तथा प्रत्येक पुलिस थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र से न्यूनतम पाँच बाल श्रमिकों की पहचान कर उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा। खतरनाक उद्योगों में 14 वर्ष से कम आयु के बाल श्रमिकों की मुक्ति के लिए विशेष छापेमारी अभियान आयोजित किए जाएँ।
छापेमारी के दौरान यदि जाँच में यह पाया जाता है कि संबंधित मालिक द्वारा किसी भी कारण से बाल श्रमिक के अभिभावकों को अग्रिम राशि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दी गई है, तो ऐसे बाल श्रमिक को बंधुआ मज़दूर माना जाएगा और नियमानुसार मालिक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी तथा ऐसे बंधुआ बाल श्रमिक को शासकीय लाभ उपलब्ध कराए जाएँगे। बाल श्रमिक नियुक्त करने वाले मालिक के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर प्रति बाल श्रमिक 20,000 रुपये ज़िला बाल कल्याण निधि में जमा कराए जाएँगे तथा शासन की ओर से प्रति बाल श्रमिक 5,000 रुपये का अंशदान किया जाएगा। इस निधि का उपयोग प्राथमिकता से उसी बाल श्रमिक के पुनर्वास हेतु किया जाए। प्रत्येक सप्ताह ज़िला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। बाल मज़दूरी जैसी सामाजिक कुप्रथा के समूल उन्मूलन हेतु प्रभावी जनजागरण अभियान चलाया जाए।
बाल श्रमिकों की मुक्ति में योगदान देने वाले एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों को बाल-स्नेही पुलिस पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। बाल मज़दूरी से बच्चों को शारीरिक व मानसिक क्षति होती है और शिक्षा की उम्र में काम करने से उनका भविष्य नष्ट होता है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम पर रखना कानूनी अपराध है। नागरिकों से अपील की गई कि ऐसी कोई घटना दिखाई देने पर तुरंत श्रम विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क करें।
जालना ज़िला नकल-मुक्त बनाने में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण
ज़िले में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र (बारहवीं) परीक्षा 10 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक तथा माध्यमिक शालांत प्रमाणपत्र (दसवीं) परीक्षा 20 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक आयोजित की जा रही है। बारहवीं परीक्षा हेतु 37,338 विद्यार्थियों के लिए 79 परीक्षा केंद्र तथा दसवीं परीक्षा हेतु 32,433 विद्यार्थियों के लिए 102 परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए हैं।
सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में परीक्षाएँ होंगी। ज़िले के संवेदनशील केंद्रों में से बारहवीं के 8 और दसवीं के 4, कुल 12 परीक्षा केंद्रों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी व वीडियोग्राफी की जाएगी। दहावी-बारहवीं परीक्षाएँ भय-मुक्त एवं पारदर्शी वातावरण में संपन्न हों, इसके लिए जालना ज़िले को नकल-मुक्त बनाने में पुलिस विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर कड़ा पुलिस बंदोबस्त रखकर किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जाए। परीक्षा केंद्रों के आसपास होने वाले गैरकानूनी कृत्यों को रोकने हेतु विशेष सतर्कता बरती जाए तथा परीक्षा अवधि के दौरान पुलिस विभाग समय-समय पर सहयोग करे—ऐसे निर्देश जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में दिए।
इस बैठक में सभी उपविभागीय पुलिस अधिकारी एवं पुलिस थाना प्रभारी ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित थे।
