परंपरागत राजनीति से अलग राह पर खान एजाज़ अहमद, जनसेवा की नई संकल्पना के साथ लोकसभा चुनाव में सक्रिय

खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
राजनीति जहां आज बड़े-बड़े मंचों, महंगी रैलियों और प्रचार के शोर में घिरी हुई दिखाई देती है, वहीं खान एजाज़ अहमद एक अलग और अनोखी सोच के साथ लोकसभा चुनाव की राजनीति में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका मानना है कि राजनीति का असली उद्देश्य केवल जनहित और देशहित की सेवा होना चाहिए, न कि इसे व्यापार या लाभ का माध्यम बनाया जाए।
खान एजाज़ अहमद का कहना है कि जब कोई उम्मीदवार जनसेवा के उद्देश्य से चुनाव मैदान में उतरता है, तो फिर वोटों की खरीद-फरोख्त और पैसे के दम पर राजनीति करने का सवाल ही नहीं उठता। उनकी सोच मौजूदा राजनीतिक परंपराओं से बिल्कुल अलग है और वे फिजूलखर्ची तथा दिखावे की राजनीति के सख्त खिलाफ हैं।
अपनी इसी संकल्पना के तहत खान एजाज़ अहमद चुनाव प्रचार के पारंपरिक तरीकों से दूर रहते हैं। वे बिना किसी राजनीतिक दल, बैनर, झंडे, रैली और बड़ी जनसभाओं के ही चुनावी मैदान में उतरते हैं। लोगों तक पहुंचने के लिए वे डोर-टू-डोर संपर्क और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का सहारा लेते हैं, ताकि सीधे जनता से संवाद किया जा सके।
खान एजाज़ अहमद की सोच का सबसे खास पहलू यह है कि वे चुनाव में हारने वाले योग्य उम्मीदवारों को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल करने की बात करते हैं। उनकी संकल्पना के अनुसार, पराजित लेकिन काबिल उम्मीदवारों को उप जनप्रतिनिधि बनाया जाना चाहिए, ताकि वे भी जनता के विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
इसी अनोखी सोच के चलते खान एजाज़ अहमद ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 23 उम्मीदवारों के बीच पांचवां स्थान हासिल किया था। अब उन्होंने वर्ष 2029 के आगामी लोकसभा चुनाव में पहला स्थान प्राप्त करने का संकल्प लिया है।
खान एजाज़ अहमद ने यह भी ऐलान किया है कि यदि वे आगामी लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करते हैं, तो वे सभी पराजित और योग्य उम्मीदवारों को “उप सांसद” का दर्जा देकर उनके साथ मिलकर, चुनी हुई सरकार के सहयोग से क्षेत्र के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उनका मानना है कि जब सभी सक्षम लोग मिलकर काम करेंगे, तभी लोकतंत्र का असली उद्देश्य और जनहित पूरी तरह साकार हो सकेगा।
