Breaking NewsJalna

रमज़ान और कुरान की अहमियत पर जालना में ‘खिताब-ए-आम’; अमीर वहदत-ए-इस्लामी हिंद मुहम्मद ज़ियाउद्दीन सिद्दीकी ने किया संबोधन

जालना | कादरी हुसैन

पवित्र रमज़ान माह के अवसर पर वहदत-ए-इस्लामी हिंद जालना की ओर से शनिवार रात तरावीह की नमाज़ के बाद खिताब-ए-आम (सार्वजनिक संबोधन) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रात लगभग दस बजे आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।

कार्यक्रम की शुरुआत अम्मार यासिर द्वारा पवित्र कुरान की तिलावत से हुई, जबकि इसका हिंदी अनुवाद अफान अहमद खान ने प्रस्तुत किया। इसके बाद मस्जिद बैदपुरा, सदर बाजार जालना के इमाम व खतीब मौलाना व मुफ्ती हाफिज मुहम्मद तारिक अनवर ने नात पेश की।

इस मौके पर लियाकत अली खान यासिर जालनावी ने कार्यक्रम के उद्देश्य और वहदत-ए-इस्लामी हिंद के मिशन, कार्यप्रणाली तथा संगठनात्मक गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

“यौमुल बद्र” के विषय पर मुख्य संबोधन करते हुए अमीर वहदत-ए-इस्लामी हिंद मुहम्मद ज़ियाउद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि रमज़ान का पवित्र महीना कुरान के अवतरण के कारण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि कुरान को “अल-फुरकान” भी कहा जाता है, जो सत्य और असत्य के बीच फर्क बताने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि पवित्र कुरान ही एकमात्र ऐसी किताब है जो स्वयं को अल्लाह का कलाम (शब्द) बताती है।

उन्होंने कहा कि कुरान इंसानों के चरित्र, नैतिकता और जीवन मूल्यों को ऊंचा उठाने वाला ग्रंथ है। कुरान की शिक्षा ने इतिहास में समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, व्यापार और नैतिक जीवन को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि जब मुसलमानों ने कुरान की शिक्षाओं को अपनाया, तब ज्ञान, विज्ञान और सभ्यता के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कुरान की पहली आयत “इक्रा” यानी “पढ़ो” है, जो ज्ञान की महत्ता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि इतिहास में अबू अली सीना, इब्न खलदून, जाबिर बिन हय्याम और इब्न नफीस जैसे महान विद्वानों ने धार्मिक और सांसारिक विज्ञान दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इब्न नफीस द्वारा लगभग 800 वर्ष पहले लिखे गए चिकित्सा संबंधी शोध आज भी चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस्लाम में ज्ञान को सर्वोच्च महत्व दिया गया है और इंसान को नैतिक व जिम्मेदार जीवन जीने की शिक्षा दी गई है। बद्र की लड़ाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि ईमान का रिश्ता खून के रिश्ते से भी अधिक मजबूत होता है और सफलता भीड़ से नहीं, बल्कि गुणवत्ता और सच्चाई से मिलती है।

कार्यक्रम के अंत में लियाकत अली खान यासिर जालनावी ने वहदत-ए-इस्लामी हिंद जालना की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में हाफिज जुबैर अहमद फारूकी की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वहदत-ए-इस्लामी हिंद जालना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विशेष प्रयास किए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button