खाड़ी में बढ़ते तनाव का जालना के स्टील उद्योग पर मंडराया खतरा; स्टील महंगा होने से निर्माण लागत बढ़ने की आशंका

जालना | कादरी हुसैन
खाड़ी देशों में बढ़ते तनावपूर्ण हालात का असर अब जालना के स्टील उद्योग पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार यदि समुद्री मार्गों पर परिवहन प्रभावित हुआ और कच्चे माल के आयात में बाधा आई, तो जालना में तैयार होने वाले स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर निर्माण क्षेत्र और आम लोगों के घर बनाने के खर्च पर पड़ सकता है।
“स्टील सिटी ऑफ इंडिया” के रूप में पहचान रखने वाली जालना औद्योगिक वसाहत देश के प्रमुख स्टील उत्पादन केंद्रों में से एक है। यहां हर वर्ष करीब 4.5 मिलियन टन स्टील सरियों का उत्पादन होता है। इस उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में स्क्रैप और आयरन जैसे कच्चे माल की आवश्यकता होती है, जिनमें से काफी हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है।
उद्योग जगत के अनुसार देश में आयात होने वाले कुल स्क्रैप का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा जालना में उपयोग होता है। यह कच्चा माल मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग से भारत पहुंचता है। लेकिन खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर समुद्री परिवहन प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है, जिससे कच्चे माल की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा स्टील उद्योग में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाला कोयला भी विदेशों से आयात किया जाता है। यदि खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और गंभीर होती है तो कोयले की आपूर्ति और कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
दूसरी ओर भारत में आयात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग से ही आता है। यदि इस मार्ग पर तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने की संभावना है, जिसका सीधा असर परिवहन खर्च पर पड़ेगा।
कालिका स्टील के संचालक और स्टील उद्योग समूह जालना के अध्यक्ष घनश्याम गोयल ने कहा कि यदि कच्चे माल और परिवहन खर्च में वृद्धि होती है, तो स्टील उत्पादन की लागत बढ़ना तय है। इसका असर बाजार में स्टील सरियों की कीमतों पर भी दिखाई देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और निजी निर्माण कार्यों पर भी पड़ेगा। घर बनाने वाले आम लोगों के लिए निर्माण लागत बढ़ना एक बड़ा आर्थिक बोझ साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात ने जालना के स्टील उद्योग में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है और उद्योग जगत अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है।