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औरंगाबाद पंचायत समिति में बवाल : अंबादास दानवे ने भाजपा उम्मीदवार की कॉलर पकड़कर जड़ा थप्पड़

औरंगाबाद/प्रतिनिधि 

औरंगाबाद  जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में औरंगाबाद जिले में भाजपा को अच्छा सफलता मिली है। 23 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनने के बाद भाजपा ने पंचायत समिति सभापति और उपसभापति पद के लिए जोरदार रणनीति शुरू कर दी है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के तीन सदस्यों को अपने पक्ष में लाकर भाजपा ने सत्ता का गणित साधने की कोशिश की।

इसकी जानकारी मिलते ही शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अंबादास दानवे ने भाजपा के सभापति पद के उम्मीदवार कल्याण गायकवाड की कॉलर पकड़कर उन्हें थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद भाजपा और शिवसेना ठाकरे गुट के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और पंचायत समिति परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। आज औरंगाबाद पंचायत समिति के सभापति और उपसभापति पद के लिए चुनाव होना है।

औरंगाबाद पंचायत समिति में भाजपा के सात सदस्य चुने गए हैं। सत्ता का समीकरण बनाने और सभापति-उपसभापति पद हासिल करने के लिए भाजपा उम्मीदवार द्वारा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के तीन सदस्यों को अपने पक्ष में करने की चर्चा सामने आई। बताया जा रहा है कि ये सदस्य कल तक पार्टी के तालुका प्रमुख और उपजिल्हा प्रमुख के संपर्क में थे, लेकिन आज अचानक गायब हो गए।

अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि भाजपा के सभापति पद के उम्मीदवार ने इन सदस्यों को पैसे का लालच देकर और पुलिस बल का उपयोग करके गायब किया है। पंचायत समिति परिसर में भाजपा उम्मीदवार के दिखाई देते ही दानवे उनकी ओर दौड़े, उनकी कॉलर पकड़ ली और थप्पड़ मार दिया, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है।

अंबादास दानवे ने भी इस घटना को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर बीच-बचाव नहीं होता तो क्या होता, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने अपनी कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं लड़ती, बल्कि पैसा और सत्ता के दम पर तोड़फोड़ की राजनीति करती है।

दानवे ने कहा कि यदि भाजपा को सत्ता के लिए समर्थन चाहिए था तो उन्हें हमारे साथ चर्चा करनी चाहिए थी। हम अपने वरिष्ठ नेताओं से अनुमति लेकर निर्णय लेते। लेकिन हमारे उम्मीदवारों को पैसे का लालच देकर और पुलिस बल का इस्तेमाल कर उन्हें गायब करना गलत है।

घटना के बाद अंबादास दानवे ने पंचायत समिति कार्यालय के बाहर धरना भी दिया। इस पूरे घटनाक्रम से इलाके का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। भाजपा कार्यकर्ता भी आक्रामक हो गए थे, जिससे स्थिति बिगड़ने की आशंका थी। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस ने दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को अलग कर हालात को नियंत्रण में लिया और बड़ा टकराव टाल दिया।

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