7 वर्षीय ज़ैद वसीम खान का पहला रोज़ा मुकम्मल, रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों ने दी मुबारकबाद

कन्नड़/अशरफ़ अली
पवित्र रमज़ान माह के दौरान कन्नड़ शहर के 7 वर्षीय ज़ैद वसीम खान ने अपना पहला रोज़ा मुकम्मल कर सभी का दिल जीत लिया। इतनी छोटी उम्र में रोज़ा रखने की उनकी लगन और हिम्मत को देखकर परिवार, रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों ने उनकी जमकर हौसला अफजाई की।
जानकारी के अनुसार ज़ैद वसीम खान ने रमज़ान के मुबारक महीने में पहली बार रोज़ा रखने का संकल्प लिया था। पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए उन्होंने पूरी लगन के साथ अपना रोज़ा मुकम्मल किया। शाम को इफ्तार के समय घर में खुशी का माहौल देखने को मिला।
ज़ैद के रोज़ा पूरा करने पर परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों ने उन्हें मुबारकबाद दी और उनकी हिम्मत की सराहना की। इस मौके पर बच्चों और बड़ों ने मिलकर इफ्तार किया और ज़ैद के उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ भी की।
परिजनों ने बताया कि रमज़ान का महीना सब्र, इबादत और नेकियों का पैगाम देता है। छोटी उम्र में बच्चों को रोज़ा और इबादत की अहमियत सिखाने से उनमें धार्मिक और नैतिक मूल्यों की समझ विकसित होती है।
ज़ैद वसीम खान के पहले रोज़े के मौके पर पूरे मोहल्ले में खुशी का माहौल देखने को मिला और लोगों ने उन्हें आगे भी इसी तरह इबादत और नेक काम करने की प्रेरणा दी।
