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वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर मुतवल्ली-इनामदार संगठन आक्रामक, 23 अप्रैल को सीईओ को सौंपेंगे ज्ञापन

जालना/कादरी हुसैन

वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन को लेकर ऑल इंडिया मुतवल्ली इनामदार ऑर्गनाइजेशन ने सख्त रुख अपनाया है। संगठन की ओर से महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष समीर गुलाम नबी काजी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा सभी बोर्ड सदस्यों को संबोधित एक विस्तृत मांगपत्र तैयार किया गया है, जिसे दिनांक 23/04/2026 को हज हाउस, औरंगाबाद (छत्रपती संभाजी नगर) में सीईओ को सौंपा जाएगा।

संगठन ने अपने निवेदन में कहा है कि वक्फ संस्थाओं के संचालन में मुतवल्ली और इनामदार रीढ़ की हड्डी हैं, लेकिन वर्तमान में उन्हें कई प्रशासनिक कठिनाइयों और अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। वक्फ अधिनियम 1995 (संशोधित 2013) के तहत बोर्ड की जिम्मेदारी होने के बावजूद समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा है।

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1)कलम 52-A के तहत कार्रवाई:
वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जा, निर्माण या बिक्री गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 2 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल पर सवाल उठाया गया है।

2)वक्फ अधिनियम की धारा 55 के अनुसार अतिक्रमण हटाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मदद अनिवार्य है। संगठन ने मांग की है कि बोर्ड तुरंत इन अधिकारियों को निर्देश देकर बुलडोजर कार्रवाई सुनिश्चित करे।

3)अतिक्रमण के दौरान हुए नुकसान की भरपाई बाजार दर के अनुसार किराया और तोड़फोड़ खर्च सहित संबंधित अतिक्रमणकारियों से ‘भूमि राजस्व बकाया’ के रूप में वसूल की जाए।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि 7 दिनों के भीतर संबंधित जमीन की सीमांकन कर अवैध निर्माण हटाए जाएं तथा दोषियों और उनके सहयोगियों पर तत्काल आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।

यदि इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठन वक्फ ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल करेगा तथा व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

संगठन ने वक्फ बोर्ड को 15 दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई की घोषणा करने का अल्टीमम दिया है। अन्यथा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई है।
संगठन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष ने सभी मुतवल्ली और इनामदारों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहकर इस महत्वपूर्ण ज्ञापन को मजबूती प्रदान करें।

इस मांगपत्र पर
काजी अमजत फारुखी (अध्यक्ष),
इम्रानशाह इनामदार (उपाध्यक्ष),
इल्यासोद्दीन खतिब (सचिव),
अजीम मनसबदार (कोषाध्यक्ष)
के हस्ताक्षर हैं।

अब 23 अप्रैल को हज हाउस में होने वाली इस प्रस्तुति और उसके बाद प्रशासन की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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