मिशन लोकसभा 2029: बिना रैली, बिना बैनर और बिना करोड़ों के चुनाव प्रचार का दावा; खान एजाज़ अहमद ने पेश किया नई राजनीति का विज़न

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
जहां देश की चुनावी राजनीति विशाल रैलियों, करोड़ों रुपये के प्रचार, झंडे-बैनरों और शक्ति प्रदर्शन के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है, वहीं औरंगाबाद के सामाजिक कार्यकर्ता एवं “मिशन लोकसभा 2029” के प्रणेता खान एजाज़ अहमद ने राजनीति का एक अलग मॉडल सामने रखने का दावा किया है। उनका कहना है कि लोकतंत्र की असली ताकत धनबल नहीं, बल्कि जनता का विश्वास, जनसेवा और पारदर्शी नेतृत्व है।
खान एजाज़ अहमद ने कहा कि उनका चुनावी अभियान पारंपरिक राजनीतिक शैली से अलग होगा। उन्होंने दावा किया कि वे महंगी रैलियों, बड़े-बड़े मंचों, झंडों, बैनरों और भारी चुनावी खर्च के बजाय सीधे जनसंपर्क, घर-घर संवाद और डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचेंगे।
उनके अनुसार चुनाव विचारों, कार्यों और जनता से सीधे संवाद के आधार पर लड़ा जाना चाहिए, न कि केवल संसाधनों और प्रचार के बल पर। उनका कहना है कि कम खर्च में भी प्रभावी और जनकेंद्रित चुनाव अभियान चलाया जा सकता है।
खान एजाज़ अहमद ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार को लेकर एक नई अवधारणा भी प्रस्तुत की। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनाव हारने वाले योग्य, ईमानदार और जनहित के प्रति समर्पित उम्मीदवारों की क्षमता का भी उपयोग होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने “उप सांसद” जैसी व्यवस्था पर विचार करने का प्रस्ताव रखा, ताकि अनुभवी लोगों को भी क्षेत्र के विकास में जिम्मेदारी मिल सके।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 23 उम्मीदवारों के बीच उन्हें पांचवां स्थान प्राप्त हुआ था। अब “मिशन लोकसभा 2029” के माध्यम से उन्होंने प्रथम स्थान हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
खान एजाज़ अहमद का कहना है कि यदि उन्हें जनता का जनादेश मिलता है, तो वे राजनीति को टकराव नहीं बल्कि सहभागिता का माध्यम बनाएंगे। उनका उद्देश्य सभी योग्य और सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों को साथ लेकर क्षेत्र के विकास का नया मॉडल तैयार करना है।
उनके अनुसार “मिशन लोकसभा 2029” केवल एक चुनावी अभियान नहीं, बल्कि कम खर्च, अधिक जनभागीदारी, पारदर्शिता और वैचारिक राजनीति की दिशा में एक नई पहल है, जिसे वे जनता के सहयोग से आगे बढ़ाना चाहते हैं।
