2029 से ‘Tax-Free Bharat’ की दिशा में बड़ा आर्थिक रोडमैप, खान एजाज़ अहमद ने रखा नया मॉडल

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
लोकसभा चुनाव 2029 को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता, CMBC प्लेटफार्म के डायरेक्टर और खासदार टाईम्स के मुख्य संपादक खान एजाज़ अहमद देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अलग और महत्वाकांक्षी विचार को राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका प्रस्ताव है कि भारत को तत्काल सभी करों से मुक्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार की जाए, जिसमें सरकार की आय का बड़ा हिस्सा करों के बजाय उत्पादन, सरकारी संपत्तियों, प्राकृतिक संसाधनों, निर्यात, निवेश और आर्थिक गतिविधियों से आए।
उनकी सोच का केंद्रीय विचार है—“जनता को सिर्फ Taxpayer नहीं, Working Partner बनाया जाए।”
हालांकि 100 प्रतिशत Tax-Free Bharat का लक्ष्य बेहद महत्वाकांक्षी है और मौजूदा वित्तीय ढांचे में इसे तुरंत लागू करना संभव नहीं माना जा सकता। इसलिए इस विचार को 2029 से शुरू होने वाले दीर्घकालीन आर्थिक मिशन के रूप में विकसित करने की जरूरत है, जिसमें हर चरण के लिए स्पष्ट लक्ष्य और आर्थिक गणित जनता के सामने रखा जाए।
मौजूदा व्यवस्था में टैक्स की भूमिका बेहद बड़ी
भारत सरकार के 2026-27 के बजट के अनुसार केंद्र का कुल अनुमानित खर्च ₹53.5 लाख करोड़ है, जबकि केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां ₹28.7 लाख करोड़ अनुमानित हैं। सकल कर राजस्व ₹44.04 लाख करोड़ अनुमानित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि मौजूदा व्यवस्था में सरकार के कामकाज के लिए कर राजस्व बेहद महत्वपूर्ण है। (India Budget)
16वें वित्त आयोग के अनुमानों के अनुसार 2026-27 में केंद्र की शुद्ध कर आय लगभग ₹30.07 लाख करोड़ और गैर-कर राजस्व करीब ₹5.03 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। आयोग के अनुमान में 2030-31 तक शुद्ध कर राजस्व बढ़कर लगभग ₹47.33 लाख करोड़ और गैर-कर राजस्व करीब ₹7.63 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। (India Budget)
यही आंकड़े बताते हैं कि यदि भारत को भविष्य में करों पर निर्भरता बहुत कम करनी है, तो सरकार को वैकल्पिक और स्थायी आय के बड़े स्रोत विकसित करने होंगे।
खान एजाज़ अहमद का प्रस्ताव: Taxpayer नहीं, Working Partner
खान एजाज़ अहमद के प्रस्तावित मॉडल में नागरिक को केवल सरकार को कर देने वाला व्यक्ति मानने के बजाय देश की आर्थिक प्रगति का भागीदार बनाने की बात कही गई है।
इस मॉडल के तहत रोजगार, स्वरोजगार, छोटे कारोबार, कृषि, विनिर्माण, निर्यात और नई तकनीक के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को उत्पादन और आय के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर होगा।
इस सोच का मूल सिद्धांत है—
“हर सक्षम भारतीय को आर्थिक रूप से सक्रिय बनाइए, उत्पादन बढ़ाइए और देश की संपत्ति से देश के विकास को वित्तपोषित कीजिए।”
सरकारी संपत्तियों से स्थायी आय बढ़ाने पर जोर
Tax-Free Bharat के लिए सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को केवल बेचकर एकमुश्त पैसा जुटाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके बजाय ऐसी संपत्तियों को लगातार आय पैदा करने वाली परिसंपत्तियों में बदलने का प्रस्ताव महत्वपूर्ण हो सकता है।
सरकार के DIPAM के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में केंद्र को सार्वजनिक क्षेत्र से करीब ₹78,438 करोड़ का dividend मिला। उसी वर्ष disinvestment receipts करीब ₹16,886 करोड़ और asset monetisation receipts करीब ₹28,420 करोड़ रहे। (DIPAM)
इससे यह संभावना सामने आती है कि सरकारी हिस्सेदारी और परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन भविष्य में गैर-कर आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
प्रस्तावित मॉडल का सिद्धांत होगा—“सरकारी संपत्ति बेचकर खर्च मत चलाइए, उसे productive asset बनाकर लगातार कमाई कीजिए।”
प्राकृतिक संसाधनों से सिर्फ रॉयल्टी नहीं, पूरी वैल्यू चेन
भारत के पास खनिज, ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी क्षमता है। लेकिन केवल कच्चे संसाधनों की बिक्री से अधिकतम आर्थिक लाभ हासिल नहीं किया जा सकता।
मॉडल में प्राकृतिक संसाधनों को निकालने के बाद देश में ही उनका processing और manufacturing बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
उदाहरण के लिए—
खनिज → Processing → Steel/Components → Manufacturing → Finished Product → Export
इससे रोजगार, उद्योग, निर्यात और आर्थिक गतिविधि सभी बढ़ेंगे।
यानी लक्ष्य केवल प्राकृतिक संसाधनों से सरकारी रॉयल्टी हासिल करना नहीं बल्कि उन्हें भारत की औद्योगिक शक्ति में बदलना होगा।
भारत को Manufacturing और Export Superpower बनाने की जरूरत
Tax burden को लंबे समय में कम करने के लिए भारत की उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार जरूरी होगा।
इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, EV, बैटरी, सौर ऊर्जा उपकरण, मशीनरी, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना होगा।
मॉडल का लक्ष्य होना चाहिए—
“Made in India को केवल भारतीय बाजार तक सीमित न रखकर दुनिया के बाजार तक पहुंचाना।”
जितना अधिक उत्पादन और निर्यात बढ़ेगा, उतनी ही बड़ी आर्थिक गतिविधि पैदा होगी। इससे रोजगार, व्यवसाय, निवेश और विदेशी मुद्रा आय को बढ़ावा मिलेगा।
AI से सरकारी खर्च और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
खान एजाज़ अहमद के प्रस्तावित मॉडल में Artificial Intelligence को सरकारी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की बात भी शामिल है।
सरकारी योजनाओं में स्वीकृत धन से लेकर भुगतान और परियोजना की वास्तविक प्रगति तक डिजिटल निगरानी की जा सकती है।
AI आधारित व्यवस्था से यह जांचने में मदद मिल सकती है कि—
किस परियोजना पर कितना पैसा मंजूर हुआ,
किसे ठेका मिला,
काम वास्तव में कितना हुआ,
भुगतान कब और कितना हुआ,
और परियोजना की लागत में असामान्य वृद्धि तो नहीं हुई।
इसका उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना ही नहीं बल्कि सरकारी धन की बर्बादी और leakage को कम करना भी होगा।
हालांकि भ्रष्टाचार समाप्त होने से अपने आप उतनी ही रकम सरकार की नई आय नहीं बन जाती। इसलिए भ्रष्टाचार नियंत्रण को revenue source के बजाय expenditure efficiency के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
National Wealth Fund की जरूरत
Tax-Free Bharat के लिए एक महत्वपूर्ण विचार National Wealth Fund का हो सकता है।
इस फंड में सरकारी कंपनियों के dividend, कुछ परिसंपत्तियों से प्राप्त आय, प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय तथा चयनित asset monetisation proceeds का एक हिस्सा लगाया जा सकता है।
इस धन को खर्च करने के बजाय दीर्घकालीन निवेश में लगाया जाए और उससे मिलने वाले returns को भविष्य की सरकारी आय का स्रोत बनाया जाए।
यानी मॉडल होगा—
आज की सरकारी संपत्ति → निवेश → लगातार रिटर्न → भविष्य की सार्वजनिक आय।
इससे सरकार को केवल कर संग्रह पर निर्भर रहने की आवश्यकता धीरे-धीरे कम की जा सकती है।
तीन चरणों में लागू हो सकता है Tax-Free Bharat Mission
खान एजाज़ अहमद के प्रस्ताव को यदि व्यावहारिक आर्थिक नीति में बदला जाए तो इसे तीन चरणों में रखा जा सकता है।
पहला चरण: 2029 से 2032
इस चरण में सभी टैक्स खत्म करने के बजाय tax burden कम करने का लक्ष्य रखा जाए।
आवश्यक वस्तुओं पर कर का बोझ कम करना, छोटे कारोबार के लिए सरल कर व्यवस्था, middle class पर प्रत्यक्ष कर का बोझ घटाना, सरकारी leakage कम करना, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की profitability बढ़ाना और निर्यात को तेज करना प्रमुख लक्ष्य हो सकते हैं।
दूसरा चरण: 2032 से 2036
इस चरण में सरकार की गैर-कर आय को तेजी से बढ़ाने और आयकर के दायरे में आने वाली आबादी का अनुपात घटाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
लक्ष्य यह हो सकता है कि एक निश्चित आय सीमा तक अधिक से अधिक नागरिकों को income-tax freedom मिले और आवश्यक सेवाओं का खर्च सरकार की बढ़ती आर्थिक क्षमता से पूरा किया जा सके।
तीसरा चरण: 2036 से 2040 और आगे
यदि उस समय तक सरकारी परिसंपत्तियों से पर्याप्त recurring income, मजबूत निर्यात, उच्च उत्पादन, बेहतर productivity और National Wealth Fund से पर्याप्त returns हासिल होने लगें, तो direct taxation को और कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
अर्थात “Tax-Free Bharat” को एक दिन में लागू होने वाली घोषणा के बजाय long-term economic destination बनाया जाए।
राज्यों को साथ लिए बिना Tax-Free Bharat संभव नहीं
इस मॉडल की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भारत का संघीय ढांचा है। केंद्र ही अकेला कर नहीं वसूलता। राज्यों और स्थानीय निकायों की भी अपनी आय और जिम्मेदारियां हैं।
इसलिए यदि भारत को व्यापक रूप से tax-free बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है तो केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों के लिए वैकल्पिक revenue model तैयार करना होगा।
GST और अन्य कर व्यवस्थाओं में किसी भी बड़े बदलाव के लिए संवैधानिक और संघीय स्तर पर व्यापक सहमति की आवश्यकता होगी।
इसलिए Tax-Free Bharat केवल केंद्र सरकार का कार्यक्रम नहीं बल्कि पूरे संघीय ढांचे का आर्थिक पुनर्गठन होगा।
सरकारी खर्च भी नियंत्रित करना होगा
केवल नई आय के स्रोत बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को यह भी तय करना होगा कि सार्वजनिक धन कहां और कितना खर्च किया जाए।
बेहतर procurement, digital monitoring, subsidy targeting, सरकारी परियोजनाओं की समय पर completion और सरकारी संस्थानों की productivity बढ़ाना इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
इसके साथ ही राजकोषीय घाटे और सरकारी कर्ज को नियंत्रण में रखना भी जरूरी होगा।
Tax खत्म करके पैसा छापना समाधान नहीं
Tax-Free Bharat के नाम पर यदि कर खत्म कर दिए जाएं और सरकार अपनी कमी को पूरा करने के लिए अत्यधिक borrowing या मुद्रा विस्तार पर निर्भर हो जाए तो महंगाई और वित्तीय अस्थिरता का खतरा पैदा हो सकता है।
इसलिए प्रस्तावित मॉडल का आधार “tax abolition” नहीं बल्कि “revenue replacement” होना चाहिए।
यानी हर एक रुपये के संभावित कर राजस्व को हटाने से पहले यह स्पष्ट करना होगा कि उसके बदले सरकार को पैसा कहां से मिलेगा।
यही होगा Tax-Free Bharat का असली आर्थिक परीक्षण।
खान एजाज़ अहमद की सोच का राजनीतिक संदेश
खान एजाज़ अहमद के प्रस्ताव का मूल राजनीतिक संदेश यह है कि सरकार और जनता के रिश्ते को केवल Taxpayer और Government के संबंध तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
उनका मॉडल नागरिक को—
Worker,
Entrepreneur,
Producer,
Exporter
और देश की आर्थिक संपत्ति का भागीदार
बनाने की दिशा में सोचता है।
इस विचार का नारा हो सकता है—
“टैक्स कम करेंगे, उत्पादन बढ़ाएंगे।
सरकारी संपत्ति से कमाएंगे, जनता के लिए खर्च करेंगे।
भ्रष्टाचार और leakage घटाएंगे, निर्यात बढ़ाएंगे।
नागरिक को Taxpayer नहीं, Working Partner बनाएंगे।”
2029 का असली सवाल
भारत को 100 प्रतिशत Tax-Free बनाना आज की वित्तीय व्यवस्था में तत्काल संभव दिखाई नहीं देता। लेकिन करों पर निर्भरता कम करना, सरकारी संपत्तियों से अधिक आय पैदा करना, उत्पादन और निर्यात बढ़ाना, सरकारी खर्च में leakage घटाना और नागरिकों को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाना एक दीर्घकालीन नीति लक्ष्य हो सकता है।
इसलिए 2029 के लोकसभा चुनाव में “100% Tax-Free Bharat” को केवल चुनावी नारे के रूप में नहीं, बल्कि “Tax-Free Bharat Mission 2040” जैसे measurable economic roadmap के रूप में जनता के सामने रखना अधिक प्रभावी और विश्वसनीय होगा।
इस मॉडल की सफलता का पैमाना भी स्पष्ट होना चाहिए—
Tax burden ↓
Government asset income ↑
Exports ↑
Manufacturing ↑
Employment ↑
Productivity ↑
Leakage ↓
Debt/GDP नियंत्रित ↓
और नागरिक की disposable income ↑
यानी लक्ष्य केवल “टैक्स खत्म करना” नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था बनाना हो जिसमें सरकार के पास जनता पर भारी कर लगाने की जरूरत लगातार कम होती जाए।
खान एजाज़ अहमद की इस सोच का केंद्रीय संदेश इसी रूप में सामने आता है—
“Tax-Free Bharat का वादा नहीं, Tax-Free Bharat का आर्थिक हिसाब।”
और यही सवाल अब जनता के सामने है—क्या भारत ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सकता है जहां सरकार की ताकत जनता से अधिक टैक्स लेने में नहीं, बल्कि देश की संपत्ति, उत्पादन और प्रतिभा से अधिक संपन्नता पैदा करने में हो?
