पलवल में गौरक्षकों की हैवानियत: पुलिस की मिलीभगत से हुई युवक की हत्या?

पलवल, हरियाणा: राजस्थान से लखनऊ जा रहे दो युवकों पर गौरक्षकों ने हमला कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित के बयान के मुताबिक, पुलिस ने ही उन्हें गौरक्षकों के हवाले किया था, जिसके बाद उन पर निर्मम हमला किया गया।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित बालकिशन के अनुसार, वह अपने साथी संदीप के साथ 22 फरवरी की रात राजस्थान के श्रीगंगानगर से लखनऊ के लिए निकले थे। जब वे रास्ता भटक गए, तो उन्होंने केएमपी हाईवे पर तैनात पुलिसकर्मियों से रास्ता पूछा। पुलिस ने पहले उनकी गाड़ी की तलाशी ली और फिर कथित तौर पर गौरक्षकों के हवाले कर दिया।
इसके बाद गौरक्षकों ने दोनों युवकों को पीटना शुरू कर दिया और उन्हें एक अलग स्थान पर ले जाकर बर्बरता से मारपीट की। तेज धारदार हथियारों से हमला करने के बाद दोनों को पास की नहर में फेंक दिया गया। बालकिशन किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा और सोना पुलिस स्टेशन पहुंचा, जहां उसे बताया गया कि मामला पलवल का है।
8 दिन बाद बरामद हुई लाश, 5 आरोपी गिरफ्तार
बालकिशन की शिकायत पर पलवल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 6 अन्य फरार हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस पर भी उठे सवाल
बालकिशन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि पुलिस ने ही उन्हें गौरक्षकों को सौंपा था। हालांकि, पलवल डीएसपी मनोज वर्मा ने कहा कि दर्ज शिकायत में ऐसा कोई जिक्र नहीं है, लेकिन अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो उसकी जांच की जाएगी।
गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी?
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि –
- आखिर इन तथाकथित गौरक्षकों को किसने इतनी छूट दी है?
- ये लोग किस अधिकार से गाड़ियों की तलाशी लेते हैं?
- क्या प्रशासन ने इन्हें कानून हाथ में लेने का अधिकार दिया है?
- क्या पुलिस की मिलीभगत के बिना ऐसी घटनाएं संभव हैं?
न्याय की मांग
इस निर्मम हत्या ने गौरक्षा के नाम पर बढ़ रही हिंसा को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। पीड़ित के परिवार ने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
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