उत्तराखंड नेशनल गेम्स में मेडल स्कैम: लाखों में बेचे जा रहे पदक, फिक्सिंग के आरोपों के बाद अधिकारी हटाए गए

हल्द्वानी: उत्तराखंड में चल रहे 38वें राष्ट्रीय खेलों (National Games 2025) में मेडल फिक्सिंग का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि ताइक्वांडो स्पर्धा में खिलाड़ियों से स्वर्ण पदक के लिए तीन लाख और रजत पदक के लिए दो लाख रुपये वसूले जा रहे थे। इस घोटाले के खुलासे के बाद डायरेक्टर ऑफ कंपटीशन (DOC) टी. प्रवीण कुमार को हटा दिया गया है और उनकी जगह एस. दिनेश कुमार को नियुक्त किया गया है।
कैसे हुआ खुलासा?
उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्य ने जब यह घोषणा की कि स्वर्ण पदक विजेताओं को 12 लाख रुपये और रजत पदक विजेताओं को 8 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी, तभी इस फिक्सिंग का मामला उजागर हुआ।
सूत्रों के अनुसार:
- ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारी खिलाड़ियों को पदक दिलाने के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूल रहे थे।
- हल्द्वानी में 4 से 8 फरवरी तक होने वाली ताइक्वांडो स्पर्धा के 16 भार वर्गों में से 10 के परिणाम पहले से तय कर लिए गए थे।
- PMC (प्रतिस्पर्धा निवारण समिति) ने समय रहते फिक्सिंग को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की और आरोपी अधिकारी को पद से हटा दिया।
GTCC की सख्त कार्रवाई
गेम्स टेक्निकल कंडक्ट कमेटी (GTCC) ने PMC की सिफारिशों के आधार पर ताइक्वांडो के प्रतियोगिता निदेशक टी. प्रवीण कुमार को हटा दिया।
GTCC अध्यक्ष सुनैना कुमारी ने कहा:
- “हमें प्रतियोगिता के पूर्व निदेशक के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। जांच में सामने आया कि उन्होंने राज्य संघों के अधिकारियों, कार्यकारी समिति के सदस्यों और उपकरण विक्रेताओं को भी प्रतियोगिता में शामिल किया था। इसलिए उन्हें हटाने का फैसला लिया गया।”
राष्ट्रीय खेलों की छवि को नुकसान
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने इस घटना पर चिंता जताई और कहा:
- “खेलों की निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है। IOA हर खिलाड़ी को योग्यता के आधार पर मेडल जीतने का मौका देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
- “राष्ट्रीय खेलों की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
खेल मंत्री रेखा आर्य का बयान
उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि सरकार मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
खेलों में पारदर्शिता पर सवाल
उत्तराखंड नेशनल गेम्स में इस फिक्सिंग कांड ने खेलों की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या प्रशासन अब अन्य खेलों की भी जांच करेगा? क्या इस स्कैम में अधिक बड़े नाम शामिल हैं? यह देखना बाकी है।
