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7 साल की उम्र से नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदगी, सौतेले पिता समेत 6 आरोपियों पर POCSO के तहत केस

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से एक नाबालिग बच्ची के साथ लंबे समय तक यौन शोषण का मामला सामने आया है। पीड़िता ने बाल कल्याण समिति के समक्ष शोषण का खुलासा करते हुए बताया कि उसके सौतेले पिता, उसके एक मित्र और चार अन्य युवकों ने अलग-अलग शहरों में उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलते ही बूंदी पुलिस ने तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार के अनुसार, बूंदी कोतवाली थाना पुलिस को चित्तौड़गढ़ की गुमशुदा बच्ची रेलवे स्टेशन पर भटकती हुई मिली। पुलिस ने उसे सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया, जहां काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने दर्दनाक खुलासे किए। बच्ची ने बताया कि वह दिल्ली और मुंबई घूमने के बाद गलती से बूंदी आ गई थी। अगले दिन, कालिका पेट्रोलिंग यूनिट ने उसे शहर के एक पार्क में एक लड़के के साथ देखा और उसे सुरक्षित हिरासत में ले लिया।

पीड़िता ने बताया कि जब वह सिर्फ 7 साल की थी, तब उसकी माँ ने दूसरी शादी कर ली और वह अपने सौतेले पिता के घर चली गई। उसने आरोप लगाया कि सौतेले पिता ने उस पर बुरी नज़र डालनी शुरू कर दी और धीरे-धीरे उसके साथ छेड़छाड़ से लेकर दुष्कर्म तक किया। जब उसने अपनी माँ को बताया, तो माँ ने उसे चुप रहने को कहा और मामले को दबा दिया।

बच्ची ने सीडब्ल्यूसी को बताया कि उसके सौतेले पिता के एक दोस्त ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके अलावा, चार अन्य युवकों ने उसे जोधपुर, उदयपुर, दिल्ली और चित्तौड़गढ़ जैसे शहरों में अपना शिकार बनाया। आरोपियों में दो बिहार, एक बाड़मेर और तीन चित्तौड़गढ़ के रहने वाले शामिल हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमा शर्मा के निर्देश पर महिला थाना प्रभारी यशोराज मीणा ने जीरो एफआईआर दर्ज की है। पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर संबंधित थानों को भेज दिया गया है।

सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने बताया कि जब पुलिस ने बच्ची के माता-पिता से संपर्क किया, तो उनका रवैया लापरवाह था। उन्होंने कहा कि बच्ची अक्सर घर से भाग जाती है, जिससे पता चलता है कि वे इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे थे।

जीरो एफआईआर एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें पीड़ित किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकता है, भले ही घटना उस थाने के क्षेत्र में न हुई हो। यह शिकायत बाद में संबंधित थाने को ट्रांसफर कर दी जाती है।

अब आगे की कार्रवाई में पुलिस द्वारा सभी आरोपियों की तलाश जारी है। मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के आधार पर आरोप पुख्ता किए जाएंगे। बच्ची को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, उसकी काउंसलिंग जारी है।

यह मामला एक बार फिर समाज में बढ़ रहे बाल यौन शोषण और पारिवारिक उपेक्षा की ओर इशारा करता है। पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे मामलों में आरोपियों को सख्त सजा मिल पाएगी?

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