“जब कांवड़ यात्रा के लिए सड़कें एक महीने बंद हो सकती हैं, तो नमाज के लिए 15 मिनट क्यों नहीं? – चंद्रशेखर आज़ाद”

मऊ (उत्तर प्रदेश) – भीम आर्मी के संस्थापक और आजाद समाज पार्टी (काशीराम) के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए यूपी में सड़क पर नमाज पर रोक को धार्मिक भेदभाव करार दिया। उन्होंने कहा कि जब कांवड़ यात्रा के लिए एक महीने तक सड़कें बंद की जा सकती हैं, तो मुसलमानों को 15 मिनट के लिए नमाज पढ़ने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती?
मऊ में पत्रकारों से बातचीत में चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार मुसलमानों, सिखों, बौद्धों, जैनों और ईसाइयों की धार्मिक आजादी को छीन रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि संत रविदास जी और बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर छुट्टी क्यों नहीं दी जाती, और उनके जुलूस निकालने की अनुमति क्यों नहीं मिल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के मुताबिक धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार अगर कांवड़ यात्रा का सम्मान करती है, तो उसे सभी धर्मों के त्योहारों और परंपराओं का भी सम्मान करना चाहिए।
चंद्रशेखर आज़ाद ‘अस्तित्व बचाओ, भाईचारा बनाओ’ अभियान के तहत मऊ में आयोजित मंडल स्तरीय प्रबुद्ध जन सम्मेलन में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी गरीबों, दलितों और पिछड़ों के हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर गरीबों के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी ने ज़मीनी स्तर पर मजबूती से काम किया है और उपचुनावों में अच्छा प्रदर्शन भी किया। अब पार्टी निर्णायक भूमिका में है। उन्होंने अपने संसदीय कार्यों की चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने पुलिस, होमगार्ड, किसान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सहायक जैसे वर्गों की समस्याएं संसद में उठाई हैं।
उपचुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि निर्णय प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा लिया जाएगा। अब्बास अंसारी की सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि सरकार विरोधियों को निशाना बना रही है।
उन्होंने प्राइवेट भर्तियों पर चिंता जताई और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एकजुट होकर पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाएं। अंत में उन्होंने दोहराया कि धार्मिक स्वतंत्रता का हनन और गरीबों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
