औरंगाबाद में बिना मंजूरी के प्लॉट लेना पड़ सकता है भारी, गुंठेवारी पर जानिए पूरा सच
क्या है 'गुंठेवारी'? किन इलाकों में होती है रोक? कितना होता है खर्च? जानिए संपूर्ण जानकारी

औरंगाबाद: महाराष्ट्र में खासकर औरंगाबाद जैसे शहरीकरण की रफ्तार पकड़ चुके क्षेत्रों में ‘गुंठेवारी’ का चलन बीते कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। किसानों की खेती योग्य जमीनों को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेचा जा रहा है, और उस पर अनधिकृत निर्माण भी हो रहा है। खास बात यह है कि इन प्लॉटों में 10, 20 या 30 गुंठे के टुकड़े बनाकर लोग मकान बनाना शुरू कर चुके हैं, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य नहीं होती।
क्या है ‘गुंठेवारी’?
‘गुंठेवारी’ का अर्थ होता है – बिना किसी अधिकृत मंजूरी के कृषि भूमि को प्लॉट में बांटकर बेचना। इसमें न तो नगररचना विभाग की मंजूरी ली जाती है, न ही जमीन को NA (नॉन-एग्रीकल्चरल) में परिवर्तित किया जाता है। परिणामस्वरूप, इन जमीनों पर बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज जैसी मूलभूत सुविधाएं अधिकृत रूप से प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। आम लोगों को सस्ते दामों पर प्लॉट तो मिल जाते हैं, लेकिन बाद में कानूनी अड़चनें, संपत्ति अधिकार, बैंक लोन, बिक्री और अतिक्रमण जैसे कई गंभीर मुद्दे सामने आते हैं।
किन क्षेत्रों में गुंठेवारी पर है रोक?
राज्य सरकार ने गुंठेवारी पर लगाम कसने के लिए कुछ इलाकों में इसे पूर्णतः प्रतिबंधित किया है। महानगरपालिका, एमआरडीए (मेट्रोपॉलिटन रीजन डेव्हलपमेंट अथॉरिटी) और पीएमआरडीए की सीमा में गुंठेवारी पर पूरी तरह से रोक है और वहां इस पर सख्त कार्रवाई हो रही है। इसके अलावा, सरकारी भूमि, सार्वजनिक उपयोग की जगहों, आरक्षित भूखंडों और डीपी रोड (विकास आराखड़ा) पर किए गए निर्माण कार्य को गुंठेवारी कानून के तहत वैध नहीं माना जाएगा।
कितना आता है खर्च?
अगर किसी प्लॉट को कानूनी रूप से अधिकृत करना हो, तो इसके लिए एनए परमिशन, डीटीपी (नगररचना) की मंजूरी, रोड प्लान, ओपन स्पेस रिजर्वेशन और स्थापनाओं की रजिस्ट्री जैसी कई कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इन सभी प्रक्रियाओं में कुल मिलाकर लगभग 1.5 लाख से 5 लाख रुपये तक का खर्च आता है।
क्या हो रही है कार्रवाई?
औरंगाबाद महानगरपालिका ने हाल ही में शहर में पांच हजार से ज्यादा अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें ध्वस्त किया है। इससे बिना मंजूरी वाले निर्माणधारकों में खलबली मच गई है। अब बड़ी संख्या में लोग अपने अवैध प्लॉट को वैध करने के लिए नगररचना विभाग में गुंठेवारी संबंधित फाइलें जमा कर रहे हैं।
सतर्क रहें, धोखाधड़ी से बचें
राज्य के कई जिलों में गुंठेवारी के नाम पर ग्राहकों को गुमराह कर आर्थिक ठगी के मामले सामने आए हैं। इसलिए यदि आप कोई प्लॉट खरीदने की सोच रहे हैं तो उसकी कानूनी वैधता की पूरी जांच-पड़ताल करें। पालिका की मंजूरी और सभी जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि के बिना प्लॉट लेना भविष्य में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।
