महाकुंभ भगदड़: सरकार पर आंकड़े छुपाने का आरोप, 15 हजार रुपये देकर चुप कराने की कोशिश?

अजमेर: महाकुंभ में हुई भगदड़ के दौरान राजस्थान के अजमेर जिले की एक 60 वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत हो गई। मृतका के पति राम नारायण ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भगदड़ में मारे गए लोगों की असली संख्या छुपाई गई है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अस्पताल में एक अधिकारी ने उन्हें 15 हजार रुपये देकर अंतिम संस्कार करने के लिए कहा था।
भगदड़ में पत्नी को खो दिया
अजमेर जिले के केकड़ी इलाके के सरवाड़ गांव की रहने वाली न्याली देवी अपने परिवार के साथ महाकुंभ में अमृत स्नान के लिए गई थीं। लेकिन वहां मची भगदड़ में उनकी जान चली गई। मृतका के पति राम नारायण ने बताया कि भगदड़ के दौरान उनकी पत्नी उनसे महज 3-4 मीटर की दूरी पर गिरी हुई थी, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वे उनकी मदद नहीं कर सके और दोनों बिछड़ गए।
राम नारायण ने अपनी पत्नी को कई घंटों तक तलाश किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। 16-17 घंटे बाद उन्हें पता चला कि न्याली देवी का शव मोतीलाल नेहरू अस्पताल में रखा गया है।
15 हजार रुपये देकर चुप रहने की कोशिश?
राम नारायण का आरोप है कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तो वहां किसी अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें 15 हजार रुपये का एक लिफाफा थमाया और कहा कि इस पैसे से अंतिम संस्कार करवा लेना। उन्हें यह तक नहीं पता कि यह लिफाफा देने वाला कौन था और उसने ऐसा क्यों किया।
सरकार ने छुपाए मौत के सही आंकड़े?
राम नारायण ने बताया कि जब उन्हें उनकी पत्नी का शव सौंपा गया, तो उसका नंबर 48 था। इसका मतलब था कि कम से कम 48 मौतें हो चुकी थीं। लेकिन सरकार और प्रशासन ने सिर्फ 30 लोगों के मरने की बात कही, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी का शव नंबर 48 था, यानी मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। सरकार ने सच छुपाने की कोशिश की है। भगदड़ के बाद मैं घंटों तक भटकता रहा, लेकिन किसी ने मेरी मदद नहीं की।”
आगे क्या होगा?
मृतका के परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और सरकार से सही आंकड़े जारी करने की मांग की है। इस घटना ने कुंभ मेले में प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार पर पहले भी धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार मृतकों की संख्या छुपाने के आरोप से विवाद और बढ़ सकता है।
सरकार और प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन घटना को लेकर राजनीतिक दलों और आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
