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नन्हीं ज़िकरा ज़फ़र पठान ने रखा पहला रोज़ा, पेश की सब्र और इबादत की मिसाल

जालना/कादरी हुसैन

इस्लाम धर्म में पाँच बुनियादी फ़र्ज़ों में से एक रोज़ा का विशेष महत्व माना जाता है। पवित्र कुरान के अनुसार रोज़ा इंसान के दिल में तक़वा (परहेज़गारी), सब्र और इंसानियत की भावना को मज़बूत करता है। भूख और प्यास का एहसास इंसान को दूसरों के दर्द को समझने की सीख देता है।

जालना जिले के घनसावंगी तहसील अंतर्गत सौंदलगाँव निवासी 6 वर्षीय ज़िकरा ज़फ़र पठान ने कम उम्र में अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखकर हिम्मत, लगन और धार्मिक आस्था की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।

रमज़ान के मुबारक महीने की शुरुआत में ज़िकरा ने सहरी (सूर्योदय से पहले का भोजन) के साथ अपने पहले रोज़े की शुरुआत की और पूरे दिन सब्र, अनुशासन और विश्वास के साथ रोज़ा पूरा किया। सूर्यास्त के बाद इफ्तार कर उन्होंने अपना रोज़ा खोला।

कम उम्र में दिखाई गई उनकी समझदारी और इबादत के प्रति समर्पण की परिवार, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने सराहना की। ज़िकरा का यह पहला रोज़ा न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण बना, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक और प्रेरक संदेश छोड़ गया।

यह यादगार पल उनकी ज़िंदगी में हमेशा खास रहेगा।

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