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पहलगाम आतंकी कहां हैं? PM मोदी ने हमारे 4 सवालों का नहीं दिया जवाब, बाकी सब बेमानी: सुप्रिया श्रीनेत

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर देश को संबोधित किया और साफ कहा कि पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई केवल “स्थगित” हुई है, खत्म नहीं। मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “आतंकवाद और बातचीत, आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते। खून और पानी भी एक साथ नहीं बह सकता।”

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देश की तीनों सेनाएं अलर्ट पर हैं और भारत की नीति अब सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की तर्ज पर ही है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ एक नई लकीर खींच दी है। अगर भारत पर हमला हुआ, तो जवाब अपने तरीके से और अपनी शर्तों पर ही दिया जाएगा।”

मोदी ने ये भी कहा कि पाकिस्तान से भविष्य में कोई बातचीत होगी तो वह सिर्फ आतंकवाद और पीओके (PoK) पर ही केंद्रित होगी। बुद्ध पूर्णिमा के दिन दिए अपने संदेश में उन्होंने कहा, “शांति का मार्ग भी शक्ति से होकर गुजरता है। भारत की ताकत ही भारत की शांति और समृद्धि की गारंटी है।”

कांग्रेस ने उठाए चार तीखे सवाल

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कई सवाल खड़े किए। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पूछा:

1. पहलगाम के आतंकी कहां हैं?
2. अमेरिका के दबाव में सीजफायर क्यों किया गया?
3. बीएसएफ जवान पूर्णम साहू को कब वापस लाया जाएगा, जो पाकिस्तान की गिरफ्त में हैं?
4. जब पूरा देश और विपक्ष आपके साथ था तो POK क्यों नहीं लिया?

सिंदूर की तरह कीमती है पर व्यापार का विषय नहीं’

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया दी और कहा, “सिंदूर की तरह ऑपरेशन भी कीमती होता है, लेकिन इसे व्यापार या सौदेबाजी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।” उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर से जुड़ी जानकारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश को यह जानकारी पीएम मोदी से मिलनी चाहिए थी, न कि किसी तीसरे देश से।

खेड़ा ने कहा, “प्रधानमंत्री से बार-बार सामूहिक संकल्प की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की गई थी। देश उनके साथ है, लेकिन जवाबदेही और पारदर्शिता भी जरूरी है।”

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने जहां देशवासियों में भरोसा और शक्ति का संदेश दिया, वहीं विपक्ष ने उसे अधूरा बताते हुए ठोस जवाबों की मांग की है। अब देखना होगा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच क्या सियासी हलचल होती है।

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