औरंगाबाद में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध करना एमआईएम के 11 पार्षदों को पड़ा भारी, मामला दर्ज

औरंगाबाद/प्रतिनिधि
औरंगाबाद नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ टीम को कार्रवाई करने से रोकना और कर्मचारियों को धक्के देकर भगा देना एमआईएम के 11 पार्षदों को महंगा पड़ गया है। सिटी चौक पुलिस ने 11 पार्षदों सहित 30 से 40 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद शहर के शाहगंज इलाके में सड़क पर अतिक्रमण कर फल बिक्री करने वाले कुछ विक्रेताओं ने चार दिन पहले एक गर्भवती महिला, उसके पति और देवर के साथ मारपीट की थी। एक महिला फल विक्रेता के साथ भी मारपीट की घटना सामने आई थी। इसके बाद शिवसेना के पार्षद ऋषिकेश जयस्वाल ने नगर निगम आयुक्त जी. श्रीकांत से शाहगंज क्षेत्र में फल विक्रेताओं और अन्य व्यवसायियों के अतिक्रमण हटाने की मांग की थी।
आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त वाहुल के नेतृत्व में विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। रमजान माह के दौरान की गई इस कार्रवाई से फल विक्रेता और स्थानीय व्यापारी नाराज हो गए। आरोप लगाया गया कि केवल मुस्लिम फल विक्रेताओं और व्यापारियों के अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले एमआईएम पार्षद अब कहां हैं।
बताया जाता है कि इसके बाद एमआईएम के प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील के नेतृत्व में पार्टी की बैठक हुई और अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद एमआईएम पार्षद शाहगंज क्षेत्र में पहुंचे और फल विक्रेताओं को दोबारा ठेले लगाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही गश्त पर मौजूद अतिक्रमण हटाओ टीम के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार कर उन्हें वहां से भगा दिया गया।
एमआईएम के विपक्ष नेता अब्दुल साजिद समीर ने कथित तौर पर कहा, “अब प्रशासकराज नहीं है, गया वो डर प्रशासक का, महापालिका किसी के बाप की जागीर नहीं।” इस बयान के बाद सत्तारूढ़ शिवसेना में रोष का माहौल बन गया। उपमहापौर राजेंद्र जंजाल ने अतिक्रमण हटाओ अभियान में बाधा डालने वाले पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए आयुक्त को पत्र भेजने की बात कही थी।
पूरे दिन चली चर्चा और हलचल के बाद नगर निगम की उपायुक्त सविता सोनवणे की शिकायत पर सिटी चौक पुलिस ने 11 पार्षदों और तीन पार्षदों के रिश्तेदारों सहित 30 से 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
जिन पार्षदों पर मामला दर्ज हुआ है, उनमें एमआईएम के विपक्ष नेता अब्दुल समीर साजिद, सय्यद ओसामा अब्दुल कदीर, काकासाहेब दामोदर काकडे, अकील अहमद (नगरसेविका तरन्नुम अखिल अहमद के पति), फिरोज खान मोईन उद्दीन खान, मेराज खान जलील खान, मोहम्मद वाजेद जागीरदार, सोहेल कुरैशी, मुंशी पटेल, मोहम्मद वसीम अलीम, अहमद मतीन पटेल साबिर (नगरसेविका फर्जाना गुलाम रसूल के दामाद), सलीम सहारा (नगरसेविका नर्गिस फातिमा के पति), अमजद चाचू (नगरसेविका खान अल्मास के पिता) सहित अन्य लोगों का समावेश है।
इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221 (सरकारी काम में बाधा), धारा 224 (सरकारी कर्मचारियों को धमकी), धारा 352(2), आपराधिक धमकी, शांति भंग करने की नीयत से गाली-गलौज, जाति-धर्म के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अफवाह फैलाना, मानहानिकारक बयान देना तथा अवैध जमावड़ा करने जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इन धाराओं के तहत तीन महीने से लेकर तीन साल तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
क्या पार्षद पद पर भी संकट?
नगरपालिका अधिनियम 1949 की धारा 10(1)(ड) के अनुसार अतिक्रमण करना, अतिक्रमण के लिए उकसाना या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध करना पार्षद की सदस्यता रद्द होने का आधार बन सकता है। एमआईएम पार्षदों पर मामला दर्ज होने के बाद पार्टी में हलचल मच गई है और अब आगे की रणनीति पर मंथन जारी है।
