औरंगाबाद मनपा चुनाव विवाद: निर्वाचन आयोग और निर्णय अधिकारी को हाईकोर्ट का निर्देश, EVM–CCTV रिकॉर्ड सुरक्षित रखें

औरंगाबाद/प्रतिनिधि
महानगरपालिका चुनाव में वार्ड क्रमांक 16 के अ और ब प्रभाग से विजयी उम्मीदवारों के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने संबंधित चुनाव की ईवीएम मशीनें, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के अंतरिम आदेश निर्वाचन आयोग एवं निर्वाचन निर्णय अधिकारी को दिए हैं।
15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए महानगरपालिका के आम चुनाव में प्रभाग 16 (अ) से संगीता नितीन सांगळे और प्रभाग 16 (ब) से राजू जगन्नाथ वाडेकर विजयी घोषित हुए थे। परिणाम घोषित होने के बाद प्रभाग 16 (अ) से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार एडवोकेट अभय टाकसाळ तथा प्रभाग 16 (ब) से शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार जहुराबी नासेर खान ने महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम 1949 की धारा 16 के अंतर्गत दिवाणी न्यायाधीश वरिष्ठ स्तर (महानगरपालिका कोर्ट), औरंगाबाद में चुनाव याचिका दायर की।
याचिका में आरोप लगाया गया कि मतगणना के दौरान ईवीएम मशीन पर मतदान की तिथि 14 जनवरी 2026 प्रदर्शित हो रही थी, जबकि वास्तविक मतदान 15 जनवरी 2026 को हुआ था। साथ ही कुछ उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे तथा संबंधित बटन कार्य नहीं कर रहे थे, जबकि अन्य उम्मीदवारों के चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। बूथ क्रमांक 32 पर यह कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद एडवोकेट अभय टाकसाळ ने 15 जनवरी 2026 को निर्वाचन निर्णय अधिकारी को तत्काल शिकायत दी थी। मतगणना के दिन भी लिखित आवेदन देकर ईवीएम में संभावित छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया।
ईवीएम में कथित छेड़छाड़ के आधार पर चुनाव रद्द कर पुनः मतदान कराने की मांग करते हुए एडवोकेट अभय टाकसाळ और जहुराबी नासेर खान ने क्रमशः चुनाव याचिका क्रमांक 14/2026 और 15/2026 दाखिल की। दोनों याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की कि जब तक चुनाव याचिका लंबित है, तब तक संबंधित चुनाव की ईवीएम, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग न्यायालय की निगरानी में सुरक्षित रखी जाए। हालांकि 27 फरवरी 2026 को यह आवेदन खारिज कर दिया गया था।
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार चुनाव के 45 दिन बाद ईवीएम से संबंधित रिकॉर्ड हटाए जाने की प्रक्रिया होती है। इसे ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ताओं ने 2 मार्च 2026 को अवकाश के दिन तत्काल याचिका दायर की। इस पर औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति संतोष चपळगावकर के समक्ष त्वरित सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट रवींद्र वी. गोरे ने दलील दी कि निर्वाचन निर्णय अधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया है कि ईवीएम पर 14 जनवरी 2026 की तिथि प्रदर्शित होना त्रुटिवश हुआ। प्रथम दृष्टया ईवीएम में छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए साक्ष्य के रूप में ईवीएम और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखना आवश्यक है।
सुनवाई के बाद न्यायालय ने निर्वाचन आयोग, विजयी उम्मीदवारों तथा अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक ईवीएम, सीसीटीवी फुटेज और वीडियो शूटिंग रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के अंतरिम आदेश पारित किए हैं।
इस प्रकरण में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट रवींद्र गोरे ने पैरवी की, जबकि एडवोकेट गौतम पहिलवान और एडवोकेट शुभम शिंदे ने उनका सहयोग किया।
