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कन्नड में हजरत सिद्दीक शाह बाबा का संदल शांतिपूर्वक संपन्न, महिला अधिकारियों के मौजूदगी में चढ़ाया गया संदल

कन्नड/अशरफ़ अली 

कन्नड शहर में हजरत सिद्दीक शाह बाबा का पवित्र उर्स बड़े ही श्रद्धा, आस्था और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। उर्स के अवसर पर आयोजित होने वाली पारंपरिक संदल की रस्म पूरे धार्मिक उत्साह के साथ अदा की गई। इस दौरान महिला अधिकारियों के मौजूदगी में संदल चढ़ाया गया, जिसने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

उर्स के अवसर पर कन्नड शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरगाह परिसर में पहुंचे और हजरत सिद्दीक शाह बाबा की दरगाह पर हाजिरी लगाकर अमन, शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। इस दौरान पूरे शहर में धार्मिक श्रद्धा और आपसी सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।

कन्नड शहर के नागरिकों में यह चर्चा भी रही कि हजरत सिद्दीक शाह बाबा का उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इस मेले में हर धर्म और समाज के लोग बड़ी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं, जिससे आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश दूर-दूर तक फैलता है।

यह उर्स मेला अपनी शानदार क़व्वाली महफिलों के लिए भी वर्षों से प्रसिद्ध रहा है। इस दरगाह की महफिलों में देश के कई मशहूर और मारूफ क़व्वाल अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। इनमें कलंदर आज़ाद, अज़ीज़ नाजा, अज़ीम नाजा, अंजुम बानो और मशहूर गायक अल्ताफ राजा जैसे कलाकारों ने अपनी क़व्वालियों से लोगों का दिल जीता है।

खासतौर पर अल्ताफ राजा द्वारा गाई गई मशहूर क़व्वाली “तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे, सुबह पहली गाड़ी से घर को लौटे जाओगे” ने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। इस क़व्वाली के माध्यम से अल्ताफ राजा को देशभर में बड़ी लोकप्रियता मिली और वे जनता के बीच बेहद मशहूर हो गए।

परंपरा के अनुसार इस उर्स मेले के अध्यक्ष पद पर कन्नड के तहसीलदार रहते हैं। इसी क्रम में कन्नड की तहसीलदार सरिका भगत, पुलिस उपविभागीय अधिकारी अपराजिता अग्निहोत्री, कन्नड नगराध्यक्ष फरीन जावेद शेख, दरगाह के मुतवल्ली तथा शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संदल की रस्म पूरी श्रद्धा और शांति के साथ संपन्न हुई।

पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उर्स के इस पावन अवसर पर लोगों ने आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देते हुए दरगाह परिसर में सामूहिक दुआ भी की।

कन्नड में हर वर्ष आयोजित होने वाला हजरत सिद्दीक शाह बाबा का यह उर्स मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है, जो शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखता है।

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