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खाड़ी में युद्ध का असर: औरंगाबाद में ऑटो गैस सेंटर पर ‘नो स्टॉक’, एलपीजी संकट से रिक्षाचालक परेशान

औरंगाबाद/प्रतिनिधि 

खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण देश में ईंधन संकट की स्थिति बनती जा रही है। औरंगाबाद शहर में एलपीजी गैस पर चलने वाली रिक्षाओं और अन्य वाहनों के लिए ईंधन भरने वाले ऑटो गैस फ्यूल सेंटरों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। शहर के कुछ ऑटो गैस सेंटर संचालकों का कहना है कि गैस की आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें अपने सेंटर बंद रखने की नौबत आ गई है।

शहर में एलपीजी ईंधन पर चलने वाली रिक्षाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। पहले पेट्रोल और डीजल पर चलने वाली रिक्षाएं अधिक थीं, लेकिन अब पेट्रोल और एलपीजी दोनों ईंधन पर चलने वाली रिक्षाओं की बिक्री शुरू होने के बाद कई रिक्षाचालकों ने पेट्रोल की जगह एलपीजी आधारित रिक्षाएं खरीद ली हैं। इसके चलते शहर में विभिन्न कंपनियों के ऑटो गैस फ्यूल सेंटर भी शुरू किए गए।

इस्राइल, ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इस युद्ध के कारण ईरान ने हार्मुज समुद्री मार्ग से मालवाहतूक को रोक दिया है। खाड़ी देशों में तेल उत्पादन भी प्रभावित हुआ है और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसका असर अब देश में भी देखने को मिल रहा है और ईंधन की कमी महसूस की जा रही है।

इस ईंधन संकट के कारण तीन दिन पहले शहर के 14 ऑटो गैस फ्यूल सेंटरों में से 6 सेंटर बंद पड़े थे। मिल कॉर्नर स्थित ऑटो गैस सेंटर से गैस की बिक्री हो रही थी, लेकिन शनिवार को समय पर गैस की आपूर्ति नहीं होने के कारण उस सेंटर को भी बंद करना पड़ा।

हालांकि, वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था के कारण रिक्षाचालकों को कुछ राहत मिल रही है। पिछले कुछ दिनों से शहर में एलपीजी रिक्षाओं को गैस मिलना मुश्किल हो गया है, फिर भी गैस पंपों पर रिक्षाओं की लंबी कतारें नहीं दिख रही हैं। इसका कारण यह है कि एलपीजी रिक्षाएं पेट्रोल पर भी चल सकती हैं। इसलिए गैस उपलब्ध नहीं होने पर कई रिक्षाचालक पेट्रोल भरवाकर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।

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