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मराठा आरक्षण पर बवाल: जरांगे का अनशन खत्म, ओबीसी नेताओं ने जीआर को बताया आरक्षण खत्म करने की साजिश!

मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बड़ा मोड़ आया है। सरकार की ओर से जीआर (शासन निर्णय) जारी किए जाने के बाद मनोज जरांगे ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि, इस जीआर को लेकर अब ओबीसी नेताओं की कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

राज्य सरकार ने जो निर्णय लिया है उसके अनुसार, जिन मराठा समाज के लोगों के पास कुणबी नोंद (दाखला) है, उन्हें कुणबी प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इस पर मंत्री छगन भुजबळ ने कहा कि इस शासन निर्णय का हमारी टीम और विधिज्ञों के साथ सखोल अध्ययन किया जा रहा है। विस्तृत अध्ययन के बाद ही मैं अपनी भूमिका स्पष्ट करूंगा।

वहीं, ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “यह जीआर संविधान विरोधी है और ओबीसी आरक्षण खत्म करने वाला है। इससे समाज के मागासवर्गीयों का स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व खत्म होगा और स्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के अधिकार भी छीन लिए जाएंगे। सरकार ने दबाव में आकर ओबीसी आरक्षण का गला घोंट दिया है।”

लक्ष्मण हाके ने आगे कहा कि अब ओबीसी समाज को तुरंत पीआईएल दाखिल करनी चाहिए और इस जीआर पर स्टे लेना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क पर संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने 2004 में सुशील कुमार शिंदे सरकार द्वारा जारी किए गए जीआर का हवाला देते हुए कहा, “वर्तमान सरकार ने वही जीआर ज्यों का त्यों लागू कर दिया है। अब छोटे-छोटे अधिकारी गांव और नातेसंबंधों की जांच करके प्रमाणपत्र बांटेंगे, जिससे सीधे तौर पर ओबीसी आरक्षण खत्म हो जाएगा। आगे से दरवाजे से रास्ता नहीं मिला तो पीछे से दीवार तोड़कर रास्ता बनाने की कोशिश की जा रही है।”

इस पूरे प्रकरण ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

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