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औद्योगिक नगरी जालना में सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाएं कम करने हेतु पुलिस के साथ व्यापारिक वर्ग की पहल

जालना/कादरी हुसैन

जालना जिले के सभी वाहन चालकों को सूचित किया जाता है कि वाहन चलाते समय मोटर वाहन अधिनियम तथा यातायात नियमों का पालन करना आवश्यक है। किंतु कुछ वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिसके कारण जिले में इस वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इन दुर्घटनाओं में कई लोगों की मृत्यु हुई है तथा अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

इन दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से दिनांक 18/04/2026 को माननीय विशेष पुलिस महानिरीक्षक की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा अभियान अंतर्गत एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जालना स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने पहल करते हुए सहयोग किया। इस अवसर पर जालना के प्रमुख स्टील उद्योगपतियों—श्री घनश्याम गोयल, श्री यशराज पित्ती, श्री विपीन पित्ती, श्री विशाल अग्रवाल, श्री आशीष भारूका, श्री दिनेश भारूका, श्री उन्मेश राठी, श्री अनूप जाजू, श्री गोपाल जिंदल एवं श्री कौस्तुभ लोहीया—का सम्मान विशेष पुलिस महानिरीक्षक श्री वीरेंद्र मिश्रा (परिक्षेत्र छत्रपति संभाजीनगर) के हाथों किया गया।

जालना जिले में बढ़ती वाहन संख्या और उससे बढ़ रही दुर्घटनाओं को देखते हुए जालना पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में जालना फर्स्ट संस्था एवं स्टील मैन्युफैक्चरर्स ने समाजहित में भाग लेते हुए दुर्घटना स्थलों पर आवश्यक उपाययोजनाओं के लिए सहयोग देने की पहल की है। स्टील उद्योगों द्वारा सड़क दुर्घटनाएं कम करने हेतु आर्थिक सहायता देने की भी जानकारी दी गई है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को 10 प्रतिशत तक कम करना है। इसके लिए पुलिस, संबंधित सड़क विभाग और आरटीओ द्वारा संयुक्त निरीक्षण कर दुर्घटना स्थलों का विश्लेषण किया जाएगा तथा आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन विशेष पुलिस महानिरीक्षक श्री वीरेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री अजय कुमार बंसल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आयुष नोपाणी तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी श्री अनंत कुलकर्णी के मार्गदर्शन में जालना पुलिस द्वारा दुर्घटनाओं में मृत्यु दर 10 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए आरटीओ जालना एवं पीडब्ल्यूडी के संयुक्त सर्वेक्षण द्वारा जिले में 115 दुर्घटना स्थलों की पहचान की गई है तथा उन पर आवश्यक उपाययोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

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