9 साल बाद मिला इंसाफ: प्रेमी को प्रेमिका की हत्या में उम्रकैद, ₹50 हजार जुर्माना

पुणे | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
पुणे के बुधवार पेठ इलाके में वर्ष 2017 में 22 वर्षीय युवती की हत्या के बहुचर्चित मामले में करीब 9 साल बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने युवती की हत्या के दोषी उसके प्रेमी सुखदेव मडावी (34 वर्ष, निवासी वडरवाडी, पुणे, मूल निवासी यवतमाल) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनी क्षीरसागर ने सुनाया।
सरकारी पक्ष के अनुसार, यह घटना 23 मई 2017 की रात करीब 9 से 10 बजे के बीच बुधवार पेठ स्थित जनता बिल्डिंग और फूड प्लाज़ा होटल के आसपास हुई थी। मृतका बुधवार पेठ में देह व्यापार का कार्य करती थी और उसका आरोपी सुखदेव मडावी के साथ प्रेम संबंध था। दोनों के बीच किसी कारण से मतभेद हो गए थे। संबंध समाप्त करने को लेकर हुए विवाद के दौरान आरोपी ने गुस्से में युवती पर चाकू से कई वार किए। उसके सीने और पेट पर गंभीर चोटें लगीं, जिससे अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
घटना के समय फरासखाना पुलिस थाने के तत्कालीन पुलिस कर्मी सुहास सालुंखे इलाके में गश्त कर रहे थे। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया। आरोपी के हाथ से चाकू छीनने के दौरान हुई झड़प में सालुंखे की उंगलियों में चोट भी आई। इसके बाद आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन सीढ़ियों से फिसलकर गिर गया, जिससे वह फरार नहीं हो सका। दूसरे पुलिसकर्मी की मदद से उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद फरासखाना पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज कर जांच पूरी कर आरोपपत्र अदालत में पेश किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अतिरिक्त सरकारी वकील नामदेव तरळगट्टी और अधिवक्ता देवतरसे ने सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों, जब्त किए गए सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध माना।
सभी साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने सुखदेव मडावी को भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ लगभग नौ वर्षों से लंबित इस बहुचर्चित हत्या मामले का आखिरकार पटाक्षेप हो गया।
