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दिल्ली हाईकोर्ट का धमाकेदार फैसला – अब पत्नी कर सकेगी पति की कॉल डिटेल और लोकेशन की पड़ताल!

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी को पति की कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा मांगने का अधिकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि पत्नी को अपने पति पर विवाहेतर संबंध होने का संदेह है, तो वह उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन डेटा सुरक्षित रखने और सार्वजनिक करने की मांग कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे रिकॉर्ड व्यभिचार के मामलों में ठोस साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने पति और उसकी कथित प्रेमिका की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। दोनों ने पारिवारिक न्यायालय के अप्रैल 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पत्नी की अर्जी स्वीकार करते हुए टेलीकॉम कंपनियों और पुलिस को जनवरी 2020 से अब तक का कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था।

पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति का एक महिला के साथ अवैध संबंध है और वे कई बार साथ यात्रा भी करते हैं। इसी आधार पर उसने व्यभिचार और क्रूरता का हवाला देते हुए 2023 में तलाक की मांग की थी।

वहीं, पति और उसकी कथित साथी ने तर्क दिया कि केवल कॉल डिटेल और टावर लोकेशन से व्यभिचार साबित नहीं हो सकता और इस आदेश से निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी का मकसद केवल प्रताड़ित करना और बदनाम करना है।

लेकिन हाईकोर्ट ने 2003 में सुप्रीम कोर्ट के शारदा बनाम धर्मपाल मामले का हवाला देते हुए कहा कि सच्चाई उजागर करने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत गोपनीयता में सीमित हस्तक्षेप स्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा टेलीकॉम कंपनियों के तटस्थ व्यावसायिक रिकॉर्ड होते हैं, जिनसे निजी बातचीत की सामग्री सामने नहीं आती, बल्कि वे परिस्थितिजन्य साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि यह कोई अटकल या अनुमान नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर विवादित मुद्दे से जुड़ा हुआ निर्देश है। यह फैसला वैवाहिक विवादों में सबूत जुटाने की प्रक्रिया और निजता के अधिकार के बीच संतुलन की नई मिसाल माना जा रहा है।

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