SIT जांच से मालेगांव में दहशत, निर्दोष मुस्लिम नागरिकों को बनाया जा रहा निशाना

नासिक: मालेगांव में हाल ही में एक बड़े विवाद ने जन्म लिया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि इस मुस्लिम बहुल शहर में हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं। उनके अनुसार, ये अवैध अप्रवासी भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, फिर भी राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर जांच के आदेश दे दिए।
एसआईटी की जांच और गिरफ्तारी
राज्य के गृह मंत्रालय के निर्देश पर एसआईटी ने मालेगांव में दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। एसआईटी ने उन लोगों को तलब किया जिन्होंने हाल ही में आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य सरकारी प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किया था। पुलिस के अनुसार, अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें निम्नलिखित लोग शामिल हैं:
- एक कॉलेज छात्र – जो आधार कार्ड में नाम संशोधन कराने गया था।
- दो महिलाएं – जिन पर पहचान पत्रों में अनियमितता का आरोप है।
- कुछ स्थानीय एजेंट और वकील – जिन पर अवैध रूप से नागरिकता प्रमाण पत्र तैयार करने का आरोप लगाया गया है।
- एक पत्रकार – जिसने इस मामले में रिपोर्टिंग की थी और सरकार पर सवाल उठाए थे।
हालांकि, जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि गिरफ्तार किए गए लोग अवैध अप्रवासी नहीं थे, बल्कि वे स्थानीय निवासी थे जिनके पास नागरिकता प्रमाण पत्र की कुछ कमियां थीं।
स्थानीय नागरिकों में भय और असंतोष
एसआईटी की इस जांच से मालेगांव के निवासियों में भय और तनाव बढ़ गया है। कई नागरिकों को केवल इसलिए तलब किया गया क्योंकि उन्होंने आधार कार्ड में मामूली संशोधन के लिए आवेदन किया था।
25 वर्षीय अब्दुल शरीफ ने बताया कि जब वह आधार कार्ड में अपने पिता के नाम की स्पेलिंग ठीक करवाने गए, तो उन्हें एसआईटी की ओर से नोटिस भेज दिया गया। पूछताछ के दौरान उनसे सवाल पूछे गए, जैसे:
- “आप भारत में कब आए?”
- “आपका जन्म प्रमाण पत्र कहां है?”
- “आपके माता-पिता के दस्तावेज़ क्या हैं?”
यह स्थिति कई अन्य नागरिकों के साथ भी हुई, जिससे स्थानीय मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ गई है।
राजनीतिक मोड़ और लोकसभा चुनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकती है। यह ध्यान देने वाली बात है कि मालेगांव-धुले लोकसभा सीट पर भाजपा को हाल ही में हार का सामना करना पड़ा था। यहां कांग्रेस प्रत्याशी शोभा बाचाव ने भाजपा प्रत्याशी को हराया था, और इस क्षेत्र के मुस्लिम वोटरों ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया था।
स्थानीय नेताओं का आरोप है कि एसआईटी की यह जांच “वोट बैंक की राजनीति” का हिस्सा है, जहां पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में डालकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।
मालेगांव के मुस्लिम समुदाय का जवाब
मालेगांव में मुस्लिम समाज ने इस मामले पर कड़ा विरोध जताया है। मालेगांव डिफेंस कमेटी और अन्य नागरिक अधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है। सामाजिक कार्यकर्ता आसिफ शेख ने कहा:
“अगर कोई अवैध अप्रवासी होता, तो एसआईटी के पास सबूत होने चाहिए थे। लेकिन यहां तो बिना किसी ठोस प्रमाण के पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में डाल दिया गया है।”
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील शाहिद नदीम ने इस मामले को अदालत में ले जाने की बात कही है।
भविष्य की रणनीति
- कानूनी लड़ाई: वकीलों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को अदालत में चुनौती देने की घोषणा की है।
- राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को विधानसभा और संसद में उठाने की बात कही है।
- जनता का विरोध: मालेगांव के नागरिकों ने इस मामले पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।
यह विवाद सिर्फ दस्तावेज़ सत्यापन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का मानना है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि भाजपा और राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रही है।
क्या यह जांच वास्तव में अवैध अप्रवासियों के खिलाफ है, या फिर यह एक राजनीतिक एजेंडा है? यह सवाल मालेगांव के हर नागरिक के मन में उठ रहा है।
