हर घर तिरंगा अभियान: झंडा फहराने से पहले जान लें ये कानूनी नियम, वरना होगी कानूनी कार्रवाई
15 अगस्त: हर घर तिरंगा अभियान के बीच तिरंगे का सम्मान करने के लिए जरूरी नियम, जानें क्या कहती है ध्वज संहिता

नई दिल्ली: कल 15 अगस्त, भारत का 79वां स्वतंत्रता दिवस है। देशभर में देशभक्ति और गर्व का माहौल चरम पर है। सड़कों से लेकर घरों और संस्थानों तक हर जगह तिरंगे के रंग बिखरने वाले हैं। इस बार भी सरकार ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को बढ़ावा दिया है, जिसके तहत हर नागरिक को अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति है। लेकिन इस जोश और जश्न के बीच तिरंगे का सम्मान बनाए रखना और उससे जुड़े नियमों का पालन करना हर भारतीय का संवैधानिक कर्तव्य है।
ध्वज संहिता और उससे जुड़े कानून
भारतीय ध्वज संहिता 2002, ‘राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम 1971’ और संबंधित प्रतिबंधक कानूनों में राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल, प्रदर्शन और संरक्षण से जुड़ी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इनका उद्देश्य न केवल तिरंगे का सम्मान बनाए रखना है, बल्कि उसकी गरिमा को हर परिस्थिति में सुरक्षित रखना भी है।
तिरंगे के इस्तेमाल से जुड़े जरूरी नियम
- सम्मानजनक स्थिति में तिरंगा – तिरंगा हमेशा सही और सम्मानजनक स्थिति में फहरना चाहिए। वह कभी भी मुड़ा-तुड़ा, फटा, गंदा या फीका नहीं होना चाहिए।
- प्लास्टिक झंडों पर प्रतिबंध – पर्यावरण संरक्षण और तिरंगे के सम्मान को देखते हुए प्लास्टिक के झंडों के इस्तेमाल पर रोक है। केवल कपड़े से बने झंडे का ही प्रयोग किया जा सकता है।
- धरातल को न छुए ध्वज – तिरंगा कभी जमीन, पानी, सड़क या किसी अन्य सतह को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
- सजावट और विज्ञापन में प्रयोग नहीं – राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी प्रकार की सजावट, विज्ञापन, परिधान या वर्दी का हिस्सा बनाना ध्वज संहिता का उल्लंघन है।
- रात्रि में फहराने के नियम – यदि तिरंगा रात में फहराया जाता है, तो उसे पर्याप्त और उपयुक्त रोशनी से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
वाहनों पर तिरंगा लगाने का अधिकार
ध्वज संहिता के अनुसार, केवल कुछ विशिष्ट पदों पर आसीन व्यक्तियों को ही अपने वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने की अनुमति है। इनमें शामिल हैं—
- भारत के राष्ट्रपति
- उपराष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- केंद्रीय मंत्री
- राज्यपाल और उपराज्यपाल
- मुख्यमंत्री
- भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- लोकसभा अध्यक्ष
नियमों का उल्लंघन और दंड
यदि कोई व्यक्ति ध्वज संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ‘राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम 1971’ के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास का प्रावधान है।
तिरंगे का सम्मान—हम सबकी जिम्मेदारी
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के बलिदान का स्मरण और देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के दौरान तिरंगे के साथ सही व्यवहार करना, उसे सम्मानपूर्वक संभालना और नियमों का पालन करना हर भारतीय का कर्तव्य है।
